लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सभी विभागों और प्राधिकरणों को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना प्रदेश में स्वच्छ, हरित और सतत परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ आधुनिक सार्वजनिक ईवी चार्जिंग अवसंरचना का तेजी से विकास सुनिश्चित करें, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़े और नागरिकों को आसानी से चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने नियंत्रणाधीन कार्यालय परिसरों, उपलब्ध सरकारी भूमि और अन्य सार्वजनिक स्थलों का सर्वे कर ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करें और उसका विवरण यूपी रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (UPREV) को निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में विभागीय कार्यालय परिसर, नगर निकायों के पार्किंग स्थल, औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क, विकास प्राधिकरणों की भूमि, राज्य राजमार्ग और एक्सप्रेसवे के किनारे उपलब्ध उपयुक्त स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके और परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक प्रस्तावित स्थल का पूरा पता, फोटोग्राफ, अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) सहित भूमि का क्षेत्रफल भी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही अतिरिक्त उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उनका विवरण भी साझा करने को कहा गया, ताकि प्रदेश में व्यापक ईवी चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में 400 से 600 वर्ग फुट तथा राज्य राजमार्गों एवं एक्सप्रेसवे पर लगभग 3000 वर्ग फुट भूमि ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त मानी गई है।
सरकार का मानना है कि सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, प्रदूषण में कमी आएगी और उत्तर प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।