बारिश के मौसम में जहां कई शहरों में जलभराव, गंदगी और यातायात की समस्या आम हो जाती है, वहीं ग्रेटर नोएडा में इस बार बेहतर प्रबंधन देखने को मिल रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ आईएएस रवि कुमार एनजी के नेतृत्व में टीम ने बारिश को चुनौती मानते हुए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं, जिसका असर बारिश के दौरान साफ दिखाई दे रहा है। प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित किया कि मानसून आने से पहले सड़क सफाई, नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त हो जाए, ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।


ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था को लेकर प्राधिकरण ने विशेष अभियान चलाया। सड़कों के किनारे पड़े कचरे, गंदगी और पॉलीथिन को हटाने का काम बड़े स्तर पर किया गया। सफाई टीमों ने सड़क से एक-एक पॉलीथिन और ऐसे कचरे को हटाया, जो बारिश के समय नालियों को जाम कर जलभराव का कारण बन सकते थे। प्राधिकरण की इस सक्रियता का फायदा यह हुआ कि बारिश के दौरान पानी की निकासी व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। शहर की सड़कों पर बड़े स्तर पर पानी जमा नहीं हुआ और लोगों को सामान्य आवागमन में राहत मिली।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बेहतर व्यवस्था के पीछे मजबूत निगरानी और समय पर लिए गए फैसलों को बड़ी वजह माना जा रहा है। CEO Ravi Kumar NG ने अधिकारियों और टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। उनके नेतृत्व में प्राधिकरण ने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर काम किया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और जहां भी सुधार की जरूरत थी, वहां तुरंत कदम उठाए गए। इस कार्यप्रणाली का परिणाम यह रहा कि बारिश के दौरान जलभराव जैसी समस्याएं काफी हद तक नियंत्रित रहीं। शहर की सफाई, जल निकासी और यातायात व्यवस्था को लेकर प्राधिकरण की तैयारियों की लोगों के बीच भी सराहना हो रही है।

ग्रेटर नोएडा और नोएडा दोनों ही उत्तर प्रदेश के प्रमुख आधुनिक शहर हैं। दोनों शहरों में तेजी से विकास हुआ है, लेकिन मानसून प्रबंधन के मामले में दोनों की स्थिति में अंतर देखने को मिलता है। जहां ग्रेटर नोएडा ने बारिश से पहले ही सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर काम पूरा कर लिया, वहीं नोएडा में बारिश के दौरान कई बार जलभराव की समस्या सामने आती है। शहर के कई इलाकों, सड़कों और अंडरपास में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नोएडा जैसे विकसित शहर में भी यदि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रहती है तो यह प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण को भी ग्रेटर नोएडा की तरह पहले से योजना बनाकर काम करने की जरूरत है।

ग्रेटर नोएडा की तैयारियां यह साबित करती हैं कि यदि प्रशासन समय रहते योजना बनाकर काम करे तो बारिश जैसी चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सफाई अभियान, पॉलीथिन हटाने, नालों की सफाई और लगातार निगरानी जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम शहर को बड़ी परेशानियों से बचा सकते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यह दिखाया है कि शहर की खूबसूरती केवल बड़े प्रोजेक्ट और ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि साफ सड़कों, बेहतर जल निकासी और नागरिक सुविधाओं से भी तय होती है।


सीईओ आईएएस रवि कुमार एनजी और उनकी टीम की मानसून से पहले की गई तैयारियां अब एक उदाहरण के रूप में सामने आ रही हैं। जरूरत है कि अन्य शहरों के प्राधिकरण भी इसी तरह सक्रियता दिखाएं, ताकि बारिश के दौरान आम जनता को परेशानी और हादसों से बचाया जा सके।