हाथरस जिले में आलू किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने मंगलवार को अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। आलू की लगातार गिरती कीमतों और उत्पादन लागत तक का मूल्य न मिलने से परेशान किसानों ने सादाबाद कस्बे में ‘आलू की अंतिम यात्रा’ निकालकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया।
किसानों का यह प्रदर्शन आगरा रोड स्थित चौधरी चरण सिंह स्मारक से शुरू हुआ। भाकियू (टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से आलू की अर्थी तैयार की और उसे कंधे पर उठाकर कस्बे की प्रमुख सड़कों से होते हुए श्मशान घाट तक ले गए। इस दौरान किसानों ने अनोखे अंदाज में अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए शोक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि आलू की मौजूदा बाजार स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि बाजार में आलू के दाम लगातार कम हो रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसानों ने अपनी फसल कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखी हुई है, लेकिन उचित कीमत नहीं मिलने के कारण उन्हें बिक्री में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण समेत कई खर्च बढ़ गए हैं, जबकि आलू की बिक्री से मिलने वाली आय लागत के मुकाबले काफी कम हो गई है।

भाकियू (टिकैत) के नेताओं ने कहा कि कई स्थानों पर किसानों को फसलों के लिए राहत और सहायता दी जा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसानों ने सरकार से आलू के लिए लाभकारी मूल्य तय करने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और फसल से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन स्थानीय विधायक प्रदीप चौधरी को सौंपा। किसानों ने विधायक से उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने की अपील की। किसान नेताओं ने कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए मजबूर होंगे।