ग्रेटर नोएडा। किसानों की लंबित मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा में आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिखाई दिया। सोमवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बाहर बड़ी संख्या में किसानों ने प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन की ओर से अलग-अलग स्तर पर किसानों की मांगों को लेकर आवाज उठाई गई। प्रदर्शन के बीच किसान नेता राकेश टिकैत भी किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। टिकैत ने यह भी कहा कि किसानों को धरने से रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनके पास संघर्ष के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बाहर डटे किसान
किसानों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई बार मुद्दे उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाया है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बाहर किसानों की मौजूदगी के साथ नारेबाजी भी देखने को मिली। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
किसानों के बीच पहुंचे राकेश टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि किसानों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता। टिकैत ने किसानों से भी आंदोलन को जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि मांगें नहीं माने जाने तक धरना खत्म नहीं किया जाएगा।
धरना रोकने की कोशिश का टिकैत ने लगाया आरोप
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को धरने पर बैठने से रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने अपनी मांगों को मजबूती से उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने संकेत दिया कि किसानों का आंदोलन आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है और मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक प्रदर्शन वापस लेने की संभावना नहीं है।
भू-माफिया से मिलीभगत के आरोप पर टिकैत का बयान
प्रदर्शन के दौरान राकेश टिकैत से किसान यूनियन के कुछ पदाधिकारियों पर कथित तौर पर भू-माफियाओं के साथ मिलकर काम करने के आरोपों को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर टिकैत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों में शामिल है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए।

यमुना और नोएडा अथॉरिटी तक पहुंचा प्रदर्शन
राकेश टिकैत ने केवल ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के प्रदर्शन में ही हिस्सा नहीं लिया, बल्कि किसानों के अन्य प्रदर्शनों में भी पहुंचकर समर्थन जताया। उन्होंने यमुना अथॉरिटी और नोएडा अथॉरिटी से जुड़े किसानों के प्रदर्शन में भी अपनी बात रखी। इससे किसानों के आंदोलन को व्यापक स्तर पर समर्थन मिलने का संदेश गया।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ ग्रेटर नोएडा से यमुना अथॉरिटी पहुंचे किसान
नोएडा अथॉरिटी के बाहर भी किसानों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ प्राधिकरण परिसर के आसपास पहुंचे। सड़कों पर ट्रैक्टरों का लंबा काफिला नजर आया और किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अब वे निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हैं। बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और किसानों की मौजूदगी से प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया।

64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजे की प्रमुख मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने की मांग शामिल है। किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन के बदले उचित और निर्धारित लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा किसान 10 फीसदी आबादी/आवासीय प्लॉट दिए जाने की मांग भी उठा रहे हैं।
2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की मांग
किसानों की एक अन्य प्रमुख मांग 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने से जुड़ी है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और उससे जुड़े अधिकारों के मामलों में उन्हें कानून के अनुरूप लाभ मिलना चाहिए। इन मांगों को लेकर किसान लंबे समय से अपनी आवाज उठाते रहे हैं और अब आंदोलन को दोबारा तेज किया गया है।
9 सितंबर से जारी है ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर धरना
किसानों के मुताबिक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सामने उनका धरना 9 सितंबर से चल रहा है। सोमवार को इस धरने को छह दिन पूरे हो गए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने की रणनीति पर वे कायम हैं।
ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना अथॉरिटी से जुड़े किसानों के प्रदर्शनों के बीच अब प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर नजर है। राकेश टिकैत के समर्थन और किसानों की बढ़ती भागीदारी से आंदोलन को नई ऊर्जा मिलने की बात सामने आ रही है। फिलहाल किसानों ने मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में किसानों और प्राधिकरण के बीच बातचीत तथा सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
रिपोर्ट – अंजू गुप्ता