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कानपुर में AI मंथन 2.0: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने AI स्टार्टअप्स के नवाचारों का किया अवलोकन

कानपुर में AI मंथन 2.0 के तहत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। प्रदर्शनी में किसान AI, डायबिटिक फुट की पहचान, हृदय स्वास्थ्य निगरानी, AI फिजियोथेरेपी, स्मार्ट क्लास, व्यक्तिगत शिक्षण, उत्तर पुस्तिकाओं के स्वचालित मूल्यांकन, जलवायु जोखिम विश्लेषण और शैक्षणिक दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन समेत कई AI नवाचार प्रदर्शित किए गए।

By: Nivedita  RNI News Network
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कानपुर में AI मंथन 2.0: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने AI स्टार्टअप्स के नवाचारों का किया अवलोकन

कानपुर, 12 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर में आयोजित ‘AI मंथन 2.0’ के तहत लगाई गई स्टार्टअप प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े स्टार्टअप्स द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विकसित किए जा रहे मॉडल, तकनीकी समाधान और नवाचारों की जानकारी ली। राज्यपाल ने स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करते हुए उनके प्रोजेक्ट की उपयोगिता, व्यावहारिक प्रभाव और आम लोगों तक उनकी पहुंच के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, जलवायु परिवर्तन और विश्वविद्यालय प्रशासन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल से विकसित समाधान प्रदर्शित किए गए।

कृषि क्षेत्र में AI से लेकर बाजार पूर्वानुमान तक के समाधान

स्टार्टअप प्रदर्शनी में किसानों के लिए AI आधारित कृषि सलाह, फसल चयन, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, पशुधन देखभाल और बाजार भाव से संबंधित तकनीकी समाधान पेश किए गए।एनकोश प्राइवेट लिमिटेड ने ‘किसान AI’ के जरिए किसानों को खेती से जुड़े कई अहम फैसलों में तकनीकी सहायता देने का समाधान प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से फसल चयन, सिंचाई, पोषण, कीट और रोग प्रबंधन, पशुधन की देखभाल तथा बाजार भाव से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं ग्रामफोरकास्ट AI, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से जुड़ा समाधान मंडी भाव, मौसम और ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर AI संचालित पूर्वानुमान उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण व्यवसायों को बेहतर कारोबारी एवं कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करना है।

डायबिटीज और हृदय रोग की पहचान में AI का इस्तेमाल

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रदर्शनी में कई महत्वपूर्ण नवाचार देखने को मिले। D-Scan 360, डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा विकसित पोर्टेबल AI आधारित स्वास्थ्य प्रणाली है। इसे मधुमेह से जुड़ी न्यूरोपैथी और डायबिटिक फुट के जोखिम की शुरुआती पहचान में मदद के लिए तैयार किया गया है। Neurocardia AI Healthcare Pvt. Ltd., मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर ने हृदय संबंधी बीमारियों की शुरुआती पहचान और लगातार स्वास्थ्य निगरानी के लिए AI आधारित पहनने योग्य माइक्रोनीडल बायोसेंसिंग प्रणाली प्रदर्शित की। इस तकनीक का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी और संभावित समस्याओं की समय रहते पहचान में सहायता करना है।

 

कानपुर में AI मंथन 2.0: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने AI स्टार्टअप्स के नवाचारों का किया अवलोकन

AI फिजियोथेरेपिस्ट और वर्चुअल क्लिनिक ने खींचा ध्यान

स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने वाले अन्य मॉडल भी प्रदर्शनी में शामिल रहे। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने ‘सुश्रुत: AI-Powered Pediatric Bone Age Prediction System’ प्रस्तुत किया। यह बच्चों की हड्डियों की उम्र के आकलन में AI तकनीक के इस्तेमाल पर आधारित समाधान है। वहीं ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने AI फिजियोथेरेपिस्ट से जुड़ा समाधान प्रदर्शित किया। इसमें कंप्यूटर विजन तकनीक के जरिए व्यक्ति की शारीरिक मुद्रा और गतिविधियों का विश्लेषण कर फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास में सहायता देने की क्षमता दिखाई गई। CSJMU-IBM Bob Hacks ’26 के अंतर्गत स्मार्ट क्लास सिस्टम, AI पॉश्चर कोच और AI आधारित वर्चुअल क्लिनिक से जुड़े मॉडल भी प्रदर्शित किए गए।

विद्यार्थियों के लिए AI आधारित अनुभवात्मक शिक्षा

शिक्षा के क्षेत्र में भी AI के इस्तेमाल से जुड़े कई मॉडल सामने आए। Firstpreneurs Tech Pvt. Ltd., हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर ने विद्यार्थियों में AI साक्षरता बढ़ाने और अनुभव आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल से जोड़ना है। KodCloud ने DevOps, क्लाउड और AI तकनीकों में कौशल विकास के लिए प्रैक्टिकल और प्रयोग आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया। इसके जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

विश्वविद्यालयों में AI आधारित व्यक्तिगत शिक्षण

ड्रोणा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए AI आधारित कई समाधान पेश किए। इनमें व्यक्तिगत शिक्षण, शिक्षकों के लिए AI सहायक तथा शिक्षण, मूल्यांकन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले AI टूल शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य छात्रों की जरूरत के अनुसार सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना और शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के काम को अधिक प्रभावी बनाना है।

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में AI की भूमिका

प्रदर्शनी में परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने वाले समाधान भी प्रस्तुत किए गए। GradeSmith ने हस्तलिखित उत्तर पुस्तिकाओं के AI आधारित मूल्यांकन और विश्लेषण की तकनीक का प्रदर्शन किया। AI के इस्तेमाल से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, मूल्यांकन संबंधी डेटा का विश्लेषण और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावनाओं पर इस मॉडल के जरिए ध्यान दिया गया।

शैक्षणिक दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन

Gestora Solutions Pvt. Ltd. ने ‘विद्यापंजी.AI’ नामक समाधान प्रदर्शित किया। इसके माध्यम से अंकपत्र, डिग्री, रजिस्टर और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटल और तेजी से सत्यापन करने की तकनीक दिखाई गई। यह समाधान विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया को आसान और अधिक तकनीक आधारित बनाने में उपयोगी हो सकता है।

दस्तावेजों और कानूनी अनुपालन के लिए AI समाधान

AuroByteAI Pvt. Ltd., महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली ने दस्तावेजों से जरूरी जानकारी निकालने, नॉलेज मैनेजमेंट और कानूनी-अनुपालन से जुड़े कार्यों के लिए AI आधारित समाधान प्रस्तुत किया। इसके साथ ही कंपनी ने स्वचालित मूल्यांकन प्रणाली भी प्रदर्शित की, जिसका इस्तेमाल मूल्यांकन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए किया जा सकता है।

जलवायु जोखिम के आकलन में AI का उपयोग

ClimAgro Analytics ने जलवायु से जुड़े जोखिमों का विश्लेषण करने वाला समाधान प्रस्तुत किया। इसमें जलवायु संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल कर कृषि, वित्तीय संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और अन्य संगठनों को निर्णय लेने में सहायता देने की क्षमता प्रदर्शित की गई। जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को पहले से समझने और उसके आधार पर रणनीति तैयार करने में इस तरह के AI आधारित विश्लेषण की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

AI से किसानों को मौसम और मंडी की जानकारी

GramForecast AI, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के समाधान में मंडी भाव, मौसम की जानकारी, पुराने आंकड़ों और AI आधारित पूर्वानुमान को एक साथ इस्तेमाल करने की व्यवस्था दिखाई गई। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण कारोबार से जुड़े लोगों को बाजार और मौसम से संबंधित बेहतर जानकारी उपलब्ध कराकर निर्णय लेने में मदद करना है।

स्वास्थ्य और पुनर्वास में कंप्यूटर विजन तकनीक

AI मंथन 2.0 की प्रदर्शनी में कंप्यूटर विजन आधारित तकनीकों को भी प्रमुखता मिली। AI फिजियोथेरेपिस्ट समाधान के जरिए शरीर की मुद्रा, गतिविधियों और मूवमेंट का विश्लेषण कर फिजियोथेरेपी और पुनर्वास प्रक्रिया में सहायता की संभावना प्रदर्शित की गई। इसी तरह ‘सुश्रुत’ सिस्टम के जरिए बाल चिकित्सा में बोन एज प्रेडिक्शन जैसी तकनीकी संभावना को सामने रखा गया।

AI को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर जोर

प्रदर्शनी के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अलग-अलग स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह समझने का प्रयास किया कि उनके AI समाधान वास्तविक जीवन की समस्याओं को किस तरह संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, जलवायु और शैक्षणिक प्रशासन से जुड़े नवाचारों की जानकारी ली। इस दौरान तकनीकी समाधान आम लोगों, किसानों, विद्यार्थियों और अन्य जरूरतमंद वर्गों तक किस तरह पहुंचाए जा सकते हैं, इस पहलू पर भी जानकारी ली गई।

AI नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच

AI मंथन 2.0 के तहत आयोजित स्टार्टअप प्रदर्शनी में विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की ओर से विकसित किए जा रहे कई उपयोगी AI मॉडल सामने आए। इन नवाचारों से स्पष्ट हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा केवल कंप्यूटर और तकनीकी उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल खेती, चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन, जलवायु और ग्रामीण विकास में भी किया जा रहा है।राज्यपाल के स्टार्टअप अवलोकन के दौरान इन तकनीकों को उच्च शिक्षा, शोध और सामाजिक उपयोग से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। AI आधारित इन प्रयासों को प्रदेश में नवाचार और तकनीकी उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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