उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई मंथन-2.0’ का समापन छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में हुआ। जन भवन, उत्तर प्रदेश और सीएसजेएम विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, कृषि, अनुसंधान और प्रशासन तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर व्यापक चर्चा हुई।
समापन समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘सीएसजेएमयू x आईबीएम बीओबी एआई हैकाथॉन-2026’ की विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किए। आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले नोडल केंद्रों को भी प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि दो दिवसीय आयोजन में एआई को विभिन्न क्षेत्रों से जोड़कर उसके व्यावहारिक उपयोग को समझने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को उन्होंने कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में शामिल हो चुकी है। यह पढ़ाई, शोध और सीखने के तरीकों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी बदल रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में 7 लाख से अधिक स्नातक विद्यार्थियों ने एआई के आधारभूत पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। वहीं, 3 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम में साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 3 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में तकनीकी सहायता का इस्तेमाल हुआ है।
राज्यपाल ने कहा कि एआई को सिर्फ एक अलग विषय के रूप में पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसकी संभावनाओं को अलग-अलग विषयों और क्षेत्रों से जोड़ना जरूरी है। गणित में एआई आधारित समस्या समाधान, विज्ञान में डेटा विश्लेषण, कृषि में स्मार्ट फार्मिंग, चिकित्सा में शुरुआती रोग पहचान, पर्यावरण में प्रदूषण की निगरानी और इंजीनियरिंग में रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में एआई महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केवल अधिक जानकारी रखने वाला व्यक्ति ही सबसे सक्षम नहीं होगा, बल्कि सही सवाल पूछने, विश्वसनीय जानकारी पहचानने और उसका समाजहित में उपयोग करने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में एआई साक्षरता, डेटा लिटरेसी, डिजिटल लिटरेसी और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को पर्याप्त महत्व देने की आवश्यकता है। उन्होंने ‘लर्निंग बाय डूइंग’ पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की जरूरत है। एआई के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, विलुप्त होती भाषाओं और बोलियों का संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण तथा पुरातात्विक धरोहरों का डिजिटल पुनर्निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने महर्षि सुश्रुत और ‘सुश्रुत संहिता’ का उदाहरण देते हुए भारत की प्राचीन चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा संबंधी उपलब्धियों का उल्लेख किया और इसे देश की समृद्ध ज्ञान विरासत बताया।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी एआई विकसित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिभा, भारतीय डेटा और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर तैयार तकनीक से डेटा सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, क्लाउड एवं कंप्यूटिंग क्षमता तथा ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में हो रहे प्रयासों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि युवाओं के हाथ में केवल डिग्री या प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि वास्तविक कौशल होना चाहिए। विश्वविद्यालयों को शोध और नवाचार के माध्यम से युवाओं में रोजगार सृजन की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं की पहचान कर एआई आधारित समाधान तैयार करें। विश्वविद्यालय उन्हें प्रयोगशाला और विशेषज्ञ मार्गदर्शन दें, जबकि उद्योग इन समाधानों को बाजार तक पहुंचाने में सहयोग करें।
प्रवेश, परीक्षा, उपस्थिति, छात्रवृत्ति, प्रमाण-पत्र, शिकायत निवारण, पुस्तकालय और संसाधन प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं को एआई की सहायता से अधिक तेज और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राज्यपाल ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में तकनीकी सहायता के उपयोग को उपयोगी बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय शिक्षक का ही होना चाहिए। एआई मूल्यांकन में सहयोग कर सकती है, लेकिन उसे अंतिम निर्णायक नहीं बनाया जाना चाहिए।
कृषि क्षेत्र में मौसम, मिट्टी, फसल, सिंचाई, उपग्रह चित्रों और बाजार से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को समय पर उपयोगी जानकारी दी जा सकती है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, कीट और फसल रोग जैसी चुनौतियों से निपटने में भी एआई मददगार हो सकती है। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में रोगों की पहचान, चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और क्लिनिकल निर्णय सहायता में एआई की संभावनाओं पर चर्चा की गई। ‘एआई मंथन-2.0’ में कैंसर पहचान, रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला चिकित्सा, क्रॉप डेटा एनालिसिस, जलवायु-स्मार्ट कृषि और प्रिसीजन एग्रीकल्चर जैसे विषयों पर भी विचार हुआ।
राज्यपाल ने कहा कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर समाज, रोजगार, निजता और लोकतांत्रिक विमर्श पर भी पड़ रहा है। इसलिए एआई के साथ नैतिकता, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, निष्पक्षता और पारदर्शिता को समझना जरूरी है। उन्होंने ‘सेफ एंड ट्रस्टेड एआई’ की अवधारणा को एआई के भविष्य के लिए आवश्यक बताया और कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव हित में जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
समापन अवसर पर बताया गया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एआई के व्यवस्थित उपयोग के लिए दो महत्वपूर्ण समूह बनाए जाएंगे। इनमें पांच विशेषज्ञों वाला एआई पॉलिसी एडवाइजरी ग्रुप और पांच कुलपतियों वाला एआई इम्प्लीमेंटेशन ग्रुप शामिल होगा। इन समूहों के माध्यम से उच्च शिक्षा में एआई से संबंधित नीति तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालयों के पुराने अभिलेखों और डेटा को डिजिटल स्वरूप में बदलकर एआई के उपयोग में लाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि एआई मंथन-2.0 का समापन वास्तव में एक नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से शिक्षा, शोध, प्रशासन, स्वास्थ्य, कृषि और कौशल विकास के क्षेत्र में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर प्राथमिक परियोजनाओं पर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एआई से डरने के बजाय इसे समझें और केवल इसके उपयोगकर्ता न बनें, बल्कि नवाचारकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ें। उनका संदेश रहा कि एआई मनुष्य की सहायता के लिए होनी चाहिए, मनुष्य पर हावी होने के लिए नहीं।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई-सक्षम बनाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाकर संयुक्त शोध, इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘एआई मंथन-2.0’ से निकले विचार उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों को नई दिशा देंगे और प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।