उत्तर प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन और डंपिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में निर्माण कार्य के लिए कुल 6.03 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
परिवहन विभाग के अनुसार बाराबंकी, पीलीभीत और शाहजहांपुर में निर्माण कार्य के लिए दूसरी एवं शेष किस्त जारी की गई है। इसमें आवश्यक मिट्टी भराई और अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी धनराशि शामिल है। स्वीकृत राशि कार्यदायी संस्था को उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
सरकार ने लखनऊ और औरैया में भी डिटेंशन यार्ड विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दोनों जिलों में नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने के बाद परियोजनाओं को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है तथा निर्माण एजेंसी को धनराशि जारी कर दी गई है।
उन्नाव और अलीगढ़ में भी डिटेंशन यार्ड के लिए भूमि उपलब्ध होने के बाद परियोजनाओं का आकलन तैयार किया जा रहा है। संबंधित प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर भेजने की प्रक्रिया जारी है।

परिवहन विभाग का कहना है कि वर्तमान में कई जिलों में जब्त वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। डिटेंशन यार्ड बनने से जब्त वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद परिवहन विभाग को जांच और प्रवर्तन अभियान के दौरान बड़ी सुविधा मिलेगी। वाहनों की निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और सुरक्षित अभिरक्षा बेहतर ढंग से की जा सकेगी। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर जब्त वाहनों के खड़े रहने की समस्या भी कम होगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन और डंपिंग यार्ड विकसित होने से परिवहन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, नियमों के प्रभावी पालन और परिवहन विभाग की कार्रवाई को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।