लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिशन रोजगार’ के तहत उत्तर प्रदेश के युवाओं को ऐतिहासिक सौगात दी है। लोकभवन सभागार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में 818 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को प्रत्यक्ष रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सवालों पर पलटवार करते हुए ऐलान किया कि अगले छह महीनों में 1 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह प्रक्रिया अनवरत जारी रहेगी, जिसकी अगली कड़ी में रविवार को भी लगभग 1,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे।
1. भर्ती का पूरा रोडमैप: किस विभाग में कितने अवसर?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेक्टर-वार नौकरियों का पूरा खाका रखा:
- पुलिस विभाग: 36,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया (मेडिकल-फिजिकल जारी)।
- होमगार्ड विभाग: 41,000 से 42,000 युवाओं की नियुक्ति।
- यूपीएसएसएससी (UPSSSC): अगले 6 महीनों में आने वाले परिणामों से 25,000 से 30,000 युवाओं को नौकरी।
- उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग: 3 से 4 महीने में परिणाम घोषित कर 20,000 से 25,000 भर्तियां।
- यूपीपीएससी (UPPSC): विभिन्न परीक्षाओं के उपरांत 15,000 से 16,000 युवाओं को विभिन्न विभागों में पदस्थापन।
- पूर्व रिकॉर्ड: सरकार अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है; इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी भी 51,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रहे हैं।
2. ग्रुप-3 और 4 में इंटरव्यू समाप्त, सिंडिकेट राज पर ‘रोमांचक’ वार
- पारदर्शिता का नया मानदंड: विज्ञापन से लेकर नियुक्ति पत्र वितरण तक समयबद्धता और मेरिट की समीक्षा हो रही है।
- इंटरव्यू खत्म: भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की गुंजाइश खत्म करने के लिए ग्रुप-3 और ग्रुप-4 की भर्तियों से इंटरव्यू सिस्टम समाप्त कर दिया गया।
- पुराना दौर बनाम आज: सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले आयोगों-बोर्डों में भाई-भतीजों को बिठाकर बिना आवेदन करने वालों को भी रेवड़ी की तरह नौकरियां बांटी जाती थीं। आज बाबा साहेब के संविधान की ताकत से चहेते सिंडिकेट बाहर हैं और योग्यता बोलती है।

3. बीमारू राज्य से ‘इकॉनमिक पावरहाउस’ तक का सफर
2017 से पहले भारत के सबसे गरीब राज्यों में शुमार यूपी की तस्वीर आज बदल चुकी है:
- आर्थिक उछाल: प्रति व्यक्ति आय, कुल अर्थव्यवस्था, महिला वर्कफोर्स और बजट का आकार तीन गुना हुआ है।
- रेवेन्यू सरप्लस: उत्तर प्रदेश पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश के मुख्य ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित है।
- एमएसएमई क्रांति: बंद पड़े एमएसएमई सेक्टर को पुनर्जीवित कर 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया।
- वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP): कारीगरों और हस्तशिल्पियों के हुनर को बाजार, टेक्नोलॉजी और सम्मान मिलने से एक्सपोर्ट लाखों करोड़ तक पहुंच गया है।
4. यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2026) की तैयारी
तिथि: 25 से 29 सितंबर 2026
स्थान: गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) – चौथा संस्करण।
विशेषता: 650+ विदेशी खरीदार (Foreign Buyers) और 2,500+ एग्जीबिटर्स हिस्सा लेंगे। स्थानीय युवा, उद्यमी और हस्तशिल्पियों के उत्पादों को वैश्विक मंच मिलेगा जिससे बड़े एक्सपोर्ट ऑर्डर सृजित होंगे।
5. स्टार्टअप और आयुष सेक्टर में अभूतपूर्व बदलाव
- स्टार्टअप बूम: 2017 से पहले जहां राज्य में बमुश्किल 120 स्टार्टअप थे, वहीं आज इनकी संख्या 24,000 से अधिक हो चुकी है। इन स्टार्टअप्स में से 50% का संचालन ‘आधी आबादी’ (महिलाएं) कर रही हैं।
- आयुष पुनर्जागरण: 2014 के बाद केंद्र में आयुष मंत्रालय के गठन और एम्स की तर्ज पर दिल्ली में सेंटर के बाद यूपी में आयुष विश्वविद्यालय व नए मेडिकल कॉलेज खड़े हो रहे हैं। आयुर्वेद, योग, यूनानी और होमियोपैथ को ग्लोबल रिकग्निशन मिला है।
6. राजनीतिक पलटवार: ‘उत्सव प्रदेश’ बनाम ‘उपद्रव प्रदेश’
सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने उत्सव प्रदेश को उपद्रव प्रदेश बनाया, किसानों को आत्महत्या के मुहाने पर छोड़ा और युवाओं की ऊर्जा को ‘लैंड-सैंड-कैटल-नकल माफिया’ के हवाले किया, वे 2027 के बाद उपदेश देने लायक भी नहीं बचेंगे। जीरो टॉलरेंस की नीति ने यूपी के माथे से पहचान के संकट के ‘काले धब्बे’ को हमेशा के लिए धो दिया है।
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश अब रुकने वाला नहीं है—युवाओं की ऊर्जा, डिजिटल इंडिया और डबल इंजन की इमानदारी से यूपी देश की नंबर-1 इकोनॉमी बनने की राह पर तेजी से दौड़ रहा है।