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यूपी में सियासी पोस्टर वार, लखनऊ समेत कई शहरों में सपा के खिलाफ लगाए गए पोस्टर

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले लखनऊ समेत कई जिलों में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान समेत कई नामों का उल्लेख करते हुए सपा के पूर्व शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्टरों पर ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ जैसे संदेश भी लिखे गए हैं।

By: Nivedita  RNI News Network
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यूपी में सियासी पोस्टर वार, लखनऊ समेत कई शहरों में सपा के खिलाफ लगाए गए पोस्टर

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। इसी बीच सोमवार को लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में समाजवादी पार्टी और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में सपा सरकार के पूर्व कार्यकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

पोस्टरों में अखिलेश यादव पर लगाए गए आरोप

लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई जिलों में पोस्टर लगाए जाने की खबर है। पोस्टरों पर अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। पोस्टरों में ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे राजनीतिक संदेश लिखे गए हैं। ये संदेश पोस्टर लगाने वालों की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के जरिए क्षेत्रवार नाम

इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा भी इस्तेमाल किया गया है। पोस्टर में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों को आधार बनाकर कई चर्चित नामों की सूची दिखाई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टरों में अवध, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कई नाम शामिल किए गए हैं। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आजम खान, अनिल दुजाना, याकूब कुरैशी और अन्य नामों का उल्लेख है।

 

लखनऊ में कई स्थानों पर पोस्टर

राजधानी लखनऊ में करीब एक दर्जन से अधिक प्रमुख स्थानों पर पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें सपा सरकार के कार्यकाल से जुड़े राजनीतिक और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को उठाते हुए विपक्षी तेवर में संदेश दिए गए हैं। पोस्टरों में कुछ पुराने आपराधिक मामलों और घटनाओं का भी संदर्भ दिया गया है। हालांकि, पोस्टरों पर लगाए गए सभी आरोपों को संबंधित न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक सरकारी बयान के रूप में नहीं देखा जा सकता।

पोस्टर लगाने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन पोस्टरों पर किसी व्यक्ति या संगठन का स्पष्ट नाम सामने नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यभर में यह पोस्टर अभियान किस संगठन या समूह की ओर से चलाया गया।

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गतिविधियां

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो रहा है। ऐसे में कई शहरों में सामने आए ये पोस्टर भी राज्य की चुनावी राजनीति में कानून-व्यवस्था और पुराने शासनकाल के रिकॉर्ड से जुड़े मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं।

 

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