लखनऊ में फैजुल्लागंज से नैमिषनगर तक 115 किमी लंबे तटबंध की योजना पर काम तेज है। करीब 2,000 करोड़ रुपये की परियोजना से बाढ़ और जलभराव प्रभावित इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है। तटबंध के साथ चार या छह लेन सड़क का भी प्रस्ताव है।
लखनऊ में फैजुल्लागंज से नैमिषनगर तक 115 किमी लंबे तटबंध की योजना पर काम तेज है। करीब 2,000 करोड़ रुपये की परियोजना से बाढ़ और जलभराव प्रभावित इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है। तटबंध के साथ चार या छह लेन सड़क का भी प्रस्ताव है।
कुशीनगर के बाढ़ खंड में तैनात एक्सईएन महेश सिंह को लेकर तटबंध टूटने के बाद गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि 28 सितंबर को अहिरौलीदान-पिपरा घाट तटबंध क्षतिग्रस्त होने के मामले में उनकी भूमिका को लेकर जांच के बाद निलंबन की संस्तुति की गई थी, लेकिन अंतिम कार्रवाई नहीं हुई। अब मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका और मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के इटरा गांव में देर रात नहर की खांधी कटने से पानी आबादी की ओर बढ़ने लगा। खतरे को देखते हुए ग्रामीण खुद मौके पर पहुंचे और फावड़ों की मदद से पानी का बहाव रोकने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग और प्रशासन से तत्काल मरम्मत व जलभराव रोकने की मांग की है।
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। निर्माणाधीन परियोजनाओं में लापरवाही पर कार्रवाई, समयबद्ध कार्य और परिसंपत्तियों के रखरखाव को लेकर सख्त निर्देश दिए
आजमगढ़ के सहबदिया सुल्तानपुर में बढ़ते नदी कटान के बीच डीएम रविन्द्र कुमार ने निरीक्षण किया। अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कटान रोधी कार्य और तट सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
Gorakhpur : गोरखपुर सिंचाई विभाग में करोड़ों का महाघोटाला उजागर हुआ है, जिसमें अधूरे और घटिया कार्य कराने के आरोप लगे हैं। कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर जिलों में परियोजनाओं पर भारी बजट खर्च होने के बावजूद किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। अब जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
Bijnor : बिजनौर में गंगा बैराज रावली के पास गंगा कटान से तटबंध और सड़क बह जाने से एक दर्जन गांव और हजारों हेक्टेयर फसल खतरे में है।प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य तेज करते हुए भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी और पत्थर व मशीनों से तटबंध को बचाने का प्रयास जारी है।ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि सिंचाई विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कटान
Kushinagar : कुशीनगर में सिंचाई विभाग के ठोकर और पार्कयू पाइन निर्माण में लाखों रुपए की हेराफेरी सामने आई है।ठेकेदार की लापरवाही और अभियंता की मिलीभगत से गुणवत्ता विहीन कार्य किए गए हैं, जिससे ठोकर दरकने लगे हैं।आगामी बाढ़ में किसानों की फसल और घरों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है, जबकि विभाग की तैयारियाँ न के बराबर हैं।
Sonbhadra : सोनभद्र के रिहंद बांध का जलस्तर 869 फीट पार होने पर रविवार आधी रात पांच फाटक खोले गए।लगभग 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और सभी छह टरबाइन फुल लोड पर चल रही हैं।चोपन क्षेत्र सहित निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने पर प्रशासन ने लोगों को अलर्ट किया है।
Gorakhpur Flood : बाढ़ खंड 2 गोरखपुर के अंतर्गत सरजू नदी के किनारे बसने वाले गांव पानी में हुए विलीन, सिंचाई विभाग की लापरवाही पर सवाल
UP Flood : बलिया में उफान पर घाघरा और सरजू नदी, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का किया दौरा
Lucknow : जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने लखनऊ के सिंचाई विभाग मुख्यालय का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्यप्रणाली और अभिलेखों की कड़ी समीक्षा। उन्होंने विभाग में पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश दिए और किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी।यह पहल जलशक्ति विभाग में सुधार और बेहतर सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Kushinagar : कुशीनगर में नारायणी नदी के तटबंधों की मरम्मत में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही सामने आई है, जहां मानसून से पहले केवल 30% काम ही पूरा हुआ।स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मनमानी और शासन की जीरो टॉलरेंस नीति की अनदेखी पर सवाल उठा रहे हैं।
Gorakhpur : गोरखपुर में राप्ती नदी के बांधों की मरम्मत अधूरी रह गई है, जिससे मानसून में टूटने का खतरा बढ़ गया है। गंडक विभाग के अधिकारी और बाहर से आए ठेकेदार सरकारी धन का दुरुपयोग कर काम अधूरा छोड़ गए हैं। इससे नदी का जलस्तर बढ़ने पर भारी जनहानि की आशंका जताई जा रही है।
Gorakhpur: गोरखपुर में बाढ़ से पहले की तैयारियों की हालत बेहद चिंताजनक है, जहां जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के गृह जनपद में भी सिंचाई और बाढ़ रोकथाम से जुड़े केवल 30% कार्य ही पूरे हो पाए हैं। गंडक विभाग के अधिकारी सिर्फ फाइलों में समीक्षा कर रहे हैं, जबकि जमीन पर अधिकांश टेंडर अधूरे हैं। राप्ती और रोहिन नदियों में बाढ़ की आशंका के बीच विभागीय लापरवाही से