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जन्माष्टमी पर 15 साल बाद बन रहा दुर्लभ ‘जयंती योग’, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषविद् पंडित अभिलाष शर्मा के अनुसार 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें मध्यरात्रि पूजा का शुभ समय।

By: BS Yadav  RNI News Network
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जन्माष्टमी पर 15 साल बाद बन रहा दुर्लभ ‘जयंती योग’, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

बिजनौर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष 4 सितंबर, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक, सिविल लाइंस बिजनौर के ज्योतिषविद् पंडित अभिलाष शर्मा के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। उनके अनुसार अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति के कारण ‘जयंती योग’ का निर्माण होगा।पंडित अभिलाष शर्मा के मुताबिक ऐसा संयोग करीब 15 साल बाद बन रहा है और इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जुड़े विशेष संयोग के समान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जयंती योग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, व्रत, जप, दान और कीर्तन का विशेष महत्व होता है।

क्या होता है जयंती योग?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग मध्यरात्रि में होता है, तब जयंती योग बनता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति के दौरान हुआ माना जाता है।पंडित अभिलाष शर्मा के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि इस योग में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और व्रत करने से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पापों का क्षय होता है। वहीं इस दिन किए गए दान, जप और कीर्तन का फल भी विशेष माना जाता है।उन्होंने यह भी बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग के दौरान जन्म लेने वाला बालक मेधावी, कला-प्रेमी और अपने कुल का नाम रोशन करने वाला हो सकता है।

4 सितंबर को रहेगी अष्टमी तिथि

पंडित अभिलाष शर्मा के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2:25 बजे शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 4 सितंबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी।वहीं 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र रात 11:04 बजे तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा के लिए मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि का होना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है।

मध्यरात्रि पूजा का शुभ समय

इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा और जन्मोत्सव के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।पूजा का शुभ मुहूर्त:
रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तकइसी अवधि में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

ब्रह्म मुहूर्त भी रहेगा विशेष

जन्माष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:30 बजे से 5:15 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, संकीर्तन और भक्ति साधना सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में मंदिरों और घरों में शंखनाद के साथ “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” का जयघोष गूंजेगा। श्रद्धालु बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करेंगे।पंडित अभिलाष शर्मा के अनुसार जन्माष्टमी का वास्तविक संदेश प्रेम, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना है। श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था व्यक्त करने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मकता और सदाचार अपनाने का अवसर भी है।

नोट: जयंती योग और पूजा के फल से जुड़ी बातें धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

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