नोएडा। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने करीब 17 किलोमीटर के यमुना क्षेत्र को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। योजना के तहत शहर के नालों से नदी में पहुंचने वाले पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के जरिए शोधित करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक कुल 24 एसटीपी स्थापित किए जाने हैं। इनमें से आठ एसटीपी लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर फाइटो ट्रीटमेंट की व्यवस्था भी की जा रही है। शेष एसटीपी की स्थापना चरणबद्ध तरीके से पूरी करने की योजना है।
योजना के तहत प्रस्तावित एसटीपी में से पांच की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की जांच IIT दिल्ली से कराई जा रही है। प्राधिकरण के अनुसार संबंधित परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाने की तैयारी है, जबकि बाकी प्रस्तावित एसटीपी भी चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जाएंगे।
नोएडा क्षेत्र में यमुना का करीब 17 किलोमीटर हिस्सा आता है। यहां कोंडली नाला प्रमुख जल निकासी मार्ग है, जिसमें शहर के कई छोटे-बड़े नालों का पानी पहुंचता है। ऐसे में नालों के पानी का उपचार यमुना में प्रदूषण रोकने की योजना का अहम हिस्सा है।

प्राधिकरण के मुताबिक एसटीपी के जरिए नालों के पानी को उपचारित करने से पानी की गुणवत्ता में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। खासतौर पर COD और BOD जैसे प्रदूषण मानकों को बेहतर करने पर ध्यान रहेगा, ताकि नदी में पहुंचने वाला पानी अधिक साफ हो।
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार यमुना कैचमेंट में प्रतिदिन करीब 7,999.63 MLD घरेलू सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि 1,755.80 MLD का उपचार गैप अभी बना हुआ है।
रिपोर्ट में यमुना बेसिन में 520 बड़े नालों की पहचान किए जाने का उल्लेख है। इनमें से कई नालों से बिना पर्याप्त उपचार के पानी नदी में पहुंचने की समस्या सामने आई है। गौतमबुद्ध नगर समेत उत्तर प्रदेश के कुछ अन्य शहरों को यमुना प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। नोएडा प्राधिकरण की इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य नालों के पानी को नदी में पहुंचने से पहले उपचारित करना है। अब परियोजनाओं की DPR, निर्माण और एसटीपी संचालन की प्रक्रिया पर आगे की प्रगति महत्वपूर्ण होगी।