लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए जिन आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें बरेली की श्रुति गंगवार भी शामिल हैं। वह झारखंड के राज्यपाल और बरेली से लंबे समय तक सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी हैं। हालांकि श्रुति की पहचान केवल राजनीतिक परिवार से नहीं है। उन्होंने तकनीक, उद्यमिता, बैंकिंग और सामाजिक क्षेत्र में भी काम किया है।
श्रुति गंगवार ने आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने आईआईएम बेंगलुरु से एंटरप्रेन्योरशिप मैनेजमेंट का अध्ययन किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आईटी क्षेत्र में करियर की शुरुआत की और इंफोसिस के साथ काम किया। इस दौरान उन्हें देश और विदेश से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव मिला।
श्रुति गंगवार ने नौकरी के बाद उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने 2012 में बेंगलुरु में शिक्षा और आईटी से जुड़ा स्टार्टअप शुरू किया। इसके बाद 2016 में नोएडा में आईटी सर्विसेज कंपनी स्थापित की।उनके मुताबिक, कंपनी के जरिए युवाओं को रोजगार देने के साथ छोटे शहरों से आने वाले युवाओं और महिलाओं को अवसर देने पर भी ध्यान दिया गया। उनकी कंपनी में करीब 250 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है।
बरेली से उनका जुड़ाव अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के जरिए और मजबूत हुआ। अगस्त 2024 में श्रुति गंगवार बैंक की चेयरपर्सन निर्विरोध चुनी गई थीं। इससे पहले अपनी मां सौभाग्यवती गंगवार के निधन के बाद वह बैंक के निदेशक मंडल में भी निर्विरोध चुनी गई थीं। बैंकिंग क्षेत्र में उनके कार्यकाल के दौरान छोटे कारोबारियों और कम आय वाले लोगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

श्रुति गंगवार की प्रोफाइल में सामाजिक कार्यों को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। उनके अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई गई है। स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ नेत्र जांच और मोतियाबिंद शिविरों के आयोजन से भी उनका जुड़ाव बताया जाता है। भारत सेवा ट्रस्ट के माध्यम से लंबे समय से ऐसे सामाजिक कार्यक्रम संचालित किए जाने का दावा किया गया है।
राजनीतिक गतिविधियों में श्रुति गंगवार की भागीदारी भी पुरानी बताई जाती है। उन्होंने 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के चुनावी अभियानों में हिस्सा लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने बरेली लोकसभा क्षेत्र की विभिन्न विधानसभा सीटों पर पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी की। हाल के वर्षों में स्थानीय स्तर पर उनकी राजनीतिक सक्रियता और बढ़ी है।
श्रुति गंगवार के राज्यसभा उम्मीदवार बनने को उनके पिता संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत से जोड़कर भी देखा जा रहा है। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार लोकसभा सांसद रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह झारखंड के राज्यपाल हैं। ऐसे में श्रुति का राज्यसभा टिकट बरेली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उनकी अपनी पहचान उद्यमिता, बैंकिंग और सामाजिक क्षेत्र में किए गए कामों से भी बनी है।
बीजेपी की राज्यसभा सूची में श्रुति गंगवार के साथ पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को भी उम्मीदवार बनाया गया है। श्रुति का चयन पार्टी की ओर से महिला नेतृत्व और नई पीढ़ी के चेहरों को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब राज्यसभा की राजनीति में प्रवेश के साथ श्रुति गंगवार के सामने अपने तकनीकी, कारोबारी और सामाजिक अनुभव को राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका में इस्तेमाल करने की चुनौती होगी।