उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, निजीकरण और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सामाजिक एवं छात्र-युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से विभिन्न जनहित के मुद्दों पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस समझौते का असर किसानों, युवाओं और शिक्षा क्षेत्र पर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि इस समझौते पर पुनर्विचार करते हुए इसे रद्द किया जाए।
ज्ञापन में देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रतिनिधियों ने पेपर लीक, भ्रष्टाचार, निजीकरण और जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई।
ज्ञापन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर हुई कार्रवाई का विरोध किया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने आजमगढ़ की नीट अभ्यर्थी सृष्टि यादव की आत्महत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का गंभीर परिणाम बताते हुए उनके परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों के कारण आत्महत्या करने वाले अन्य अभ्यर्थियों के परिवारों को भी आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में साहित्यकार और चिंतक राहुल सांकृत्यायन की पश्चिम बंगाल के रानीगंज में स्थापित प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना की भी निंदा की गई। प्रतिनिधियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और प्रतिमा को सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि ज्ञापन में शामिल सभी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं। इस दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि किसानों, छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।