कानपुर, 12 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में दो दिवसीय AI मंथन 2.0 की शुरुआत हुई। जन भवन, उत्तर प्रदेश और विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी और तकनीकी टीमों समेत 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
AI मंथन 2.0 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य, कृषि, शासन, रोजगार और तकनीकी विकास में संभावित उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने में AI की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उद्घाटन सत्र में AI के विकास, भविष्य की संभावनाओं, शोध में इसके इस्तेमाल और शिक्षा व्यवस्था में संभावित बदलावों को लेकर प्रस्तुतियां दी गईं। उत्तर प्रदेश को AI के क्षेत्र में सक्षम बनाने की रणनीति पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने प्रस्तुति के माध्यम से विश्वविद्यालय की प्रगति और AI से जुड़े नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक AI निर्माता के रूप में विकसित करने के विजन को आगे बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा संस्थान प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नौ विश्वविद्यालयों को NAAC में A++ ग्रेड, चार को A+ और पांच विश्वविद्यालयों को A ग्रेड प्राप्त हुआ है। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस के लिए समर्थ पोर्टल के इस्तेमाल से करीब 200 करोड़ रुपये की बचत का भी उल्लेख किया। कुलपति ने यह भी बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालय सामाजिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों ने बड़ी संख्या में आंगनबाड़ियों को गोद लेने के साथ टीबी मरीजों की देखभाल और HPV टीकाकरण अभियान में भी योगदान दिया है।
राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने AI मंथन के पहले संस्करण का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले आयोजन में AI की बुनियादी समझ, AI साक्षरता, कौशल विकास और उच्च शिक्षा में इसके इस्तेमाल पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि AI महज तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि व्यापक परिवर्तन लाने वाली तकनीक है। इसके बेहतर इस्तेमाल के लिए छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों समेत सभी हितधारकों में AI साक्षरता बढ़ाना जरूरी है।

डॉ. बोबडे के मुताबिक AI मंथन 2.0 का उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक इस्तेमाल को बढ़ाना है। इसमें उच्च शिक्षा, कृषि और चिकित्सा शिक्षा के लिए क्षेत्र विशेष के AI मॉडल और उत्पादों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करने के लिए डेटा एनालिटिक्स और AI के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा। भविष्य में AI आधारित करियर एक्सेलेरेटर, स्टार्टअप इंजन, स्मार्ट कंटेंट टूल, ऑटोमेटेड ग्रेडिंग और AI आधारित प्रवेश प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर काम करने की तैयारी है।
डॉ. बोबडे ने उत्तर प्रदेश में समर्थ पोर्टल की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि करीब 56 लाख सक्रिय विद्यार्थी समर्थ रजिस्ट्री से जुड़े हैं और बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लाखों विद्यार्थियों ने ऑनलाइन प्रवेश लिया। कई विश्वविद्यालयों में परीक्षा परिणाम भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रोसेस किए गए। सत्र 2026-27 में एकेटीयू ने पहली बार समर्थ के जरिए ऑनलाइन काउंसलिंग की, जिसमें 499 कॉलेज शामिल हुए।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने AI के इतिहास और विकास पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने शुरुआती कंप्यूटिंग तकनीक से लेकर न्यूरल नेटवर्क, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, AlphaGo और जनरेटिव AI जैसे चरणों के जरिए आधुनिक AI के विकास को समझाया। उन्होंने कहा कि AI अब जटिल वैज्ञानिक और गणितीय समस्याओं के समाधान में भी उपयोगी साबित हो रहा है। हालांकि इसके साथ साइबर सुरक्षा, तकनीक के दुरुपयोग और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। उन्होंने AI के जिम्मेदार और मानव हित में इस्तेमाल पर जोर दिया।
आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने AI के जरिए अलग-अलग ज्ञान क्षेत्रों को जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी और अन्य तकनीकी पहलों से शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में उपयोगी कंटेंट तैयार करने, कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहायता देने और AI ट्यूटर जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं। साथ ही उन्होंने AI के ऊर्जा इस्तेमाल और तकनीकी पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियों को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश के AI रोडमैप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि UP AI Mission के लिए अगले पांच वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की गई है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 225 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2031 तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में AI टैलेंट, डेटा, कंप्यूटिंग क्षमता और भरोसेमंद AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का लक्ष्य है।
पांच लाख युवाओं को AI में दक्ष बनाने की योजना
UP AI Mission के तहत पांच लाख AI-फ्लुएंट युवाओं को तैयार करने, 200 से ज्यादा हैंड्स-ऑन AI लैब स्थापित करने और 20 से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की योजना बताई गई।इसके साथ ही प्रत्येक जिले में ‘CM AI Fellow’ के माध्यम से AI से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। मिशन में AI रिसर्च, स्टार्टअप, MSME सहयोग, फ्यूचर स्किल्स और उन्नत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
फिलिप्स इंडिया एवं IIIT इलाहाबाद से जुड़े डॉ. दिनेश एम.एस. ने स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि मेडिकल इमेजिंग, कैंसर की शुरुआती पहचान और क्लिनिकल निर्णय में AI डॉक्टरों की सहायता कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI चिकित्सकों की जगह लेने के बजाय क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम कर सकता है और अंतिम निर्णय डॉक्टर का ही रहेगा। डॉ. दिनेश ने स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता को लेकर फेडरेटेड लर्निंग जैसी तकनीकों की उपयोगिता समझाई। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीक के जरिए मरीजों का मूल डेटा संबंधित अस्पतालों में सुरक्षित रखते हुए AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा सकता है।
AI मंथन 2.0 में विशेषज्ञों ने माना कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और रोजगार समेत जीवन के कई क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतना भी जरूरी होगा। दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में AI के व्यावहारिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों, सरकार, उद्योग और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय तैयार करना है।