प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी धार्मिक कॉरिडोर रामवन गमन मार्ग के एक हिस्से के निर्माण पर सवाल उठने लगे हैं। प्रयागराज में श्रृंगवेरपुर धाम के पास सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा अलग-अलग स्थानों पर धंस गया है। सड़क पर दरारें आने और रिटेनिंग वॉल के कुछ हिस्सों के झुकने की बात भी सामने आई है। खास बात यह है कि यह स्थिति मार्ग के उद्घाटन से पहले सामने आई है।
बताया जा रहा है कि लखनऊ मार्ग से गंगा पुल के बीच करीब 100 मीटर के हिस्से में चार अलग-अलग स्थानों पर सड़क बैठ गई है। कई जगहों पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं। सड़क के किनारे बनी रिटेनिंग वॉल के कुछ हिस्सों के झुकने से भी निर्माण की मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्रृंगवेरपुर धाम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान इसी क्षेत्र से गंगा पार की थी।
रामवन गमन मार्ग को अयोध्या और चित्रकूट के बीच धार्मिक एवं पर्यटन कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। करीब 210 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित फोर-लेन मार्ग को अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर, कौशांबी और चित्रकूट से जोड़ने की योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4400 से 4550 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना का वर्चुअल शिलान्यास किया था।
सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर मरम्मत का काम शुरू कराया। गड्ढों को भरने के लिए बालू और बजरी डाली जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित हिस्से पर वाहनों की आवाजाही भी रोक दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की जल्द मरम्मत कराई जाएगी।
एनएच के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रवींद्र पाल सिंह के मुताबिक, क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण सड़क का यह हिस्सा प्रभावित हुआ है। उन्होंने जल्द मरम्मत कराने की बात कही है। हालांकि, सड़क के निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तकनीकी जांच में सड़क धंसने की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।
स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क पहली ही बारिश में कई स्थानों पर धंसने लगी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर संदेह पैदा होता है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि निर्माण में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रामवन गमन मार्ग जैसी बड़ी परियोजना में सड़क का उद्घाटन से पहले क्षतिग्रस्त होना निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता की जांच अब चर्चा का विषय बन गई है। निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक सहित संबंधित एजेंसियों की भूमिका और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
रामवन गमन मार्ग को केवल परिवहन परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह अयोध्या और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने वाली परियोजना है। ऐसे में निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद सड़क के धंसने की घटना ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें विभागीय जांच और मरम्मत के बाद सड़क की स्थिति पर हैं। यदि तकनीकी जांच में निर्माण संबंधी खामी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करना भी महत्वपूर्ण होगा।