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Mathura: बांके बिहारी मंदिर में टूटी वर्षों पुरानी परंपरा, वेतन न मिलने से ठप पड़ा ठाकुर जी का बाल और शयन भोग

बांके बिहारी मंदिर में भोग निर्माण की जिम्मेदारी उस हलवाई को दी गई थी, जिसकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत की गई थी। समिति ने मंदिर की व्यवस्था सुधारने और भोग-प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रणाली लागू की थी।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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Mathura: बांके बिहारी मंदिर में टूटी वर्षों पुरानी परंपरा, वेतन न मिलने से ठप पड़ा ठाकुर जी का बाल और शयन भोग

मथुरा के विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में वर्षों से चली आ रही एक महत्वपूर्ण परंपरा इस सप्ताह अचानक टूट गई। ठाकुर जी का बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं हो सका, जिससे भक्तों में निराशा और मंदिर प्रशासन की ओर सवालों का सिलसिला शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार भोग तैयार करने वाले हलवाई को पिछले कई महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते उसने भोग निर्माण करने में असमर्थता जता दी।

हाई पावर कमेटी के अंतर्गत हुई थी हलवाई की नियुक्ति

बांके बिहारी मंदिर में भोग निर्माण की जिम्मेदारी उस हलवाई को दी गई थी, जिसकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत की गई थी। समिति ने मंदिर की व्यवस्था सुधारने और भोग-प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रणाली लागू की थी। हलवाई का मासिक वेतन 80 हजार रुपये तय किया गया था। लेकिन बीते कई महीनों से भुगतान न होने के कारण हलवाई ने काम बंद कर दिया।

भोग निर्माण बंद, भक्त हुए निराश

बाल भोग और शयन भोग मंदिर की पारंपरिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका न बन पाना न केवल परंपरा के टूटने जैसा है, बल्कि दूर-दूर से आए भक्तों की आस्था को भी ठेस पहुंचाता है। भोग न मिलने से मंदिर की दैनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

मंदिर प्रशासन पर उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद हलवाई को समय पर वेतन न मिलना एक गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। भक्तों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस विषय पर तत्काल कदम उठाकर भोग व्यवस्था को बहाल करना चाहिए, क्योंकि यह केवल कार्य प्रणाली नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा और आस्था का विषय है।

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