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नोएडा प्राधिकरण पहुंचे राकेश टिकैत, किसानों की 17 सूत्रीय मांगों पर हुई बैठक

नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारियों से करीब दो घंटे बैठक की। विकसित भूखंड, मुआवजा, आबादी के मामलों और लंबित प्लॉट आवंटन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। किसानों का धरना अभी जारी है।

By: Nivedita  RNI News Network
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नोएडा प्राधिकरण पहुंचे राकेश टिकैत, किसानों की 17 सूत्रीय मांगों पर हुई बैठक

नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। इसी क्रम में बुधवार को किसान नेता राकेश टिकैत बड़ी संख्या में किसानों के साथ ट्रैक्टरों पर सवार होकर सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। यहां किसानों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्राधिकरण के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं।

सीईओ के साथ करीब दो घंटे चली बैठक

राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल की नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के साथ बैठक हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में किसानों से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों और उनकी मांगों के समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों की ओर से लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा गया और इनके जल्द निस्तारण की मांग की गई।

विकसित भूखंड और मुआवजे का मुद्दा प्रमुख

किसानों की 17 सूत्रीय मांगों में विकसित भूखंड, उचित मुआवजा, आबादी से जुड़े मामलों का समाधान और लंबित प्लॉटों का आवंटन प्रमुख हैं। किसानों की मांग है कि वर्ष 1976 से 1997 के बीच प्रभावित किसानों को पांच प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाएं। इसके साथ ही अधिग्रहित जमीन के मुआवजे और आवासीय निर्माण से संबंधित मामलों के निस्तारण की मांग भी बैठक में उठाई गई।

 

लंबे समय से जारी है किसानों का धरना

किसानों का कहना है कि उनकी कई मांगें काफी समय से प्राधिकरण के स्तर पर लंबित हैं। उनका आरोप है कि इन मुद्दों को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अपेक्षित समाधान अभी तक नहीं हुआ है। मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों का धरना भी जारी है।

बैठक के बाद आगे की रणनीति पर फैसला

बैठक के दौरान राकेश टिकैत ने किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने संकेत दिया कि मांगों के समाधान की दिशा में होने वाली प्रगति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब किसानों की नजर प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर है। आने वाले दिनों में मांगों को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच होने वाली बातचीत आंदोलन की आगे की दिशा तय कर सकती है।

 

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