मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का 38वां दीक्षांत समारोह बुधवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह में कुल 92,332 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि विभिन्न संकायों के 199 मेधावी छात्रों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। सभी उपाधियां और अंकपत्र डिजिटल सुविधा के तहत डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध कराए गए।
दीक्षांत समारोह में छात्राओं का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उपाधियों और पदकों की संख्या में बेटियों ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर यह साबित किया कि उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। राज्यपाल ने इसे समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताते हुए अभिभावकों से बेटों और बेटियों को समान अवसर देने की अपील की।
समारोह के दौरान सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर के 700 आंगनबाड़ी केंद्रों को उपयोगी किट वितरित की गईं। वहीं 950 बालिकाओं का एचपीवी (HPV) टीकाकरण भी कराया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों की बेटियां भी शामिल रहीं।
गुजरात की प्रसिद्ध लोक कलाकार रसीलाबेन कांजीभाई डुंगरिया को भारतीय लोककला, हस्तशिल्प संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्वविद्यालय ने मानद डी.लिट्. की उपाधि प्रदान की।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र सेवा का माध्यम बननी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़े हुनरमंद लोगों को औपचारिक शिक्षा और डिग्री से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश में आर्ट एंड क्राफ्ट यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी। इससे लाखों शिल्पकारों और कारीगरों को नई पहचान और अवसर मिलेंगे।
उन्होंने प्रदेश को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के अभियान में विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। राज्यपाल ने बताया कि जनभागीदारी के माध्यम से प्रदेश में लाखों टीबी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और इस अभियान को आगे बढ़ाने में शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से शोध और पुस्तक लेखन को बढ़ावा देने की अपील करते हुए पुस्तकालयों को रात 12 बजे तक खुला रखने के निर्देश दिए। उन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन, विक्रम-1 रॉकेट, गगनयान मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई वैज्ञानिक तकनीकों जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी बल दिया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर पूरी तरह नशामुक्त होने चाहिए। साथ ही युवाओं से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में ज्ञान, नवाचार, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को नैक की ए++ ग्रेडिंग, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन तथा शोध कार्यों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्राओं की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत ढांचे के विकास, पर्यावरण अनुकूल परिसर और सरकारी विद्यालयों को गोद लेकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य करने के निर्देश दिए।