उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। चुनाव आयोग ने शुरुआती तैयारियों के तहत प्रदेश के 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO), उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, FLC और सुपरवाइजरों को लखनऊ बुलाया है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। चुनाव आयोग ने शुरुआती तैयारियों के तहत प्रदेश के 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO), उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, FLC और सुपरवाइजरों को लखनऊ बुलाया है।
गाजीपुर पहुंचे मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं और बच्चियों के लिए मुफ्त बस यात्रा सेवा की जानकारी दी। उन्होंने अखिलेश यादव और सपा सरकार पर निशाना साधते हुए 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पार्टी की तैयारियों पर भी बात की। राजभर ने 403 सीटों पर संगठन मजबूत करने और गठबंधन में सीटों का फैसला चुनाव के समय होने की बात कही। अब्बास अंसारी को लेकर
समाजवादी पार्टी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 'पीडीए 2.0' रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी दलित, गैर-यादव पिछड़े और अन्य सामाजिक वर्गों को जोड़कर अपना आधार मजबूत करने की तैयारी में है। सपा दलितों को अधिक प्रतिनिधित्व देने और नए सामाजिक समीकरणों के जरिए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति बना रही है।
गोरखपुर में भाजपा बूथ अध्यक्ष सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बूथ संगठन को चुनावी जीत की सबसे अहम कड़ी बताया। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कार्यकर्ताओं से विपक्ष के कथित दुष्प्रचार का जवाब देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने सरकार की विकास और जनकल्याण योजनाओं का भी उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बांदा दौरे पर कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। उन्होंने संगठन को आगामी चुनावों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया और भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
बलिया में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के कार्यक्रम में पहुंचे परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा जनसमर्थन मिलेगा और विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ेगा।
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले हैं। खासकर पूर्वांचल क्षेत्र में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है, क्योंकि बिहार और यूपी के बीच रोटी-बेटी का गहरा रिश्ता है।