लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से सोमवार को जन भवन में केरल के आईआईटी पलक्कड़ से आए 55 सदस्यीय दल ने मुलाकात की। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत युवा संगम कार्यक्रम में शामिल यह दल उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के भ्रमण पर है। दल में 50 विद्यार्थी और पांच शिक्षक शामिल हैं। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने, व्यावहारिक कौशल सीखने और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया।
युवा संगम कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा, परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराना है। आईआईटी पलक्कड़ का यह दल 22 से 28 अक्टूबर तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आतिथ्य में उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहा है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से उनकी यात्रा के अनुभवों और सीख के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की यात्रा का उद्देश्य केवल पर्यटन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां की सामाजिक व्यवस्था, खान-पान, सांस्कृतिक विरासत और विकास कार्यों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अनुभवों को लेखों के माध्यम से साझा करने और परिवार, मित्रों तथा सहपाठियों के साथ उन पर चर्चा करने की सलाह दी।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि करियर की योजना बनाते समय केवल सरकारी नौकरी को ही एकमात्र विकल्प नहीं मानना चाहिए। युवाओं को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार कौशल विकसित कर स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को व्यावहारिक प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ दूसरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने में भी सहायक हो सकती है।
राज्यपाल ने वाराणसी में महिला नेतृत्व वाले विकास और कौशल आधारित गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग इकाई के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए महिलाओं को प्रशिक्षण के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी क्षमताओं को पहचानकर और नए कौशल सीखकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। उन्होंने देश की सुरक्षा और सेवा से जुड़े क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। छात्राओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उपलब्ध अवसरों के अनुरूप तैयारी करने की सलाह दी गई।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निरंतर समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश के 19 विश्वविद्यालयों को नैक मूल्यांकन में ए-प्लस और ए-प्लस-प्लस श्रेणी की मान्यता मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में प्रदेश के सात विश्वविद्यालयों और विभिन्न विभागों ने स्थान हासिल किया है। विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

विद्यार्थियों से संवाद के दौरान राज्यपाल ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की।उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेनी चाहिए। मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने से चुनौतियों का सामना करना आसान होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, पुस्तकालय जाने और सकारात्मक सोच बनाए रखने की भी सलाह दी।

राज्यपाल ने जन भवन परिसर में संचालित विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने कहा कि यहां स्थापित आदर्श माध्यमिक विद्यालय में वंचित परिवारों के 450 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ खेलकूद, स्केटिंग, जूडो, कराटे और बैंड प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को विश्वविद्यालयों से जोड़ने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी बच्चों की पढ़ाई तथा सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। बाल गृहों में रहने वाली बालिकाओं के लिए शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्यपाल ने जन भवन में विकसित पंचतंत्र वन, नक्षत्र वन और मियावाकी वन जैसी पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिसर में 10 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, बच्चों की देखभाल और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी ज्ञान और सामाजिक मूल्यों का विकास करना भी है।
युवा संगम के तहत केरल से आए विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित स्वागत और वृक्षारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दल ने श्री काशी विश्वनाथ धाम और सारनाथ सहित कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया है। इसके अलावा अयोध्या धाम, तीर्थराज प्रयाग और विंध्याचल धाम की यात्रा के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समझने का अवसर मिल रहा है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस यात्रा से प्राप्त अनुभवों को अपने जीवन में अपनाएं और देश की विविधता का सम्मान करते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।