लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों के साथ स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की व्यापक समीक्षा बैठक की। बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों की प्रगति, लंबित परियोजनाओं, भूमि संबंधी समस्याओं, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों और जिला स्तर पर आवश्यक सहयोग की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों, नगर आयुक्तों और नगर निकायों को निर्देश दिए कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं तथा प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने प्रदेश के सभी 13,924 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। धार्मिक, पर्यटन एवं विरासत स्थलों पर पर्याप्त सफाईकर्मी तैनात कर प्रतिदिन दो बार सफाई व्यवस्था लागू करने तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1533 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा।
मुख्य सचिव ने लंबित भूमि संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान कर डीपीआर (DPR) समय पर तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजने तथा स्वीकृत परियोजनाओं के टेंडर और क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी न होने देने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रत्येक डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन पर चार अलग-अलग डस्टबिन उपलब्ध कराने और प्रत्येक घर, वार्ड एवं नगर निकाय स्तर पर गीला, सूखा, सैनिटरी एवं विशेष देखभाल अपशिष्ट के चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पृथक किए गए कचरे को संबंधित प्रसंस्करण इकाइयों तक ही भेजा जाए।
मुख्य सचिव ने सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के प्रभावी संचालन, स्पेशल सेल के माध्यम से नियमित निगरानी तथा परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों पर सीसीटीवी कैमरे, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए, ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने रीड्यूस-रीयूज-रीसायकल (RRR) केंद्रों, अधिकृत रीसाइक्लर्स के साथ समझौते (MoU) और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर बल दिया। साथ ही उपचारित जल (Treated Water) के सुरक्षित उपयोग की नीति को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उद्योगों और सिंचाई में एसटीपी के पुनर्चक्रित जल के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलों से गार्बेज वल्नरेबल प्वाइंट (GVP) समाप्त किए जाएं, टैप्ड और अनटैप्ड नालों की नियमित सफाई हो तथा नगर निकायों में पर्याप्त सफाईकर्मी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने यूजर चार्ज की प्रभावी वसूली, नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अनुरूप नगर निकायों के उपविधियों को शीघ्र अधिसूचित करने के निर्देश भी दिए।
इसके अलावा कम्पोस्टिंग प्लांट, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF), वेस्ट-टू-एनर्जी (W2E) प्लांट, नगर ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों और लीगेसी वेस्ट रेमेडिएशन कार्यों की नियमित समीक्षा करने, खुले में कचरा फेंकने और जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने तथा पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक जिले में एक स्पेशल सेल गठित करने के निर्देश दिए, जो स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। आवश्यकता पड़ने पर यह सेल नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े ठोस अपशिष्ट उत्पादकों के विरुद्ध जल एवं विद्युत आपूर्ति बंद करने जैसी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी करेगा।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। सभी विभाग आपसी समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास की दिशा में अग्रणी राज्य बनाने में योगदान दें।