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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सवाल: PNC Infratech, जैन परिवार और CBI जांच का क्या है कनेक्शन?

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में नुकसान और मरम्मत के वीडियो सामने आने के बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। विवाद के बीच PNC Infratech का नाम चर्चा में है, जिसके चेयरमैन एवं एमडी प्रदीप कुमार जैन हैं और बीजेपी राज्यसभा सांसद नवीन जैन उनके भाई हैं। PNC का नाम 2024 के एक अलग CBI रिश्वत मामले में भी सामने आया था, जिसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, हालांकि उस समय तक आरोप तय नहीं हुए थे।

By: Nivedita  RNI News Network
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सवाल: PNC Infratech, जैन परिवार और CBI जांच का क्या है कनेक्शन?

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में सामने आए नुकसान और मरम्मत के वीडियो ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर काम होते दिखाया गया, जबकि कुछ रिपोर्टों में मरम्मत के दौरान पंखों से सड़क सुखाने का दृश्य भी सामने आया। NHAI ने इसे निर्माण विफलता के बजाय प्रिवेंटिव मेंटेनेंस बताया है। इसी विवाद के बीच PNC Infratech का नाम चर्चा में है। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक प्रदीप कुमार जैन कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में चार दशक से अधिक का अनुभव है।

सड़क की हालत ने खड़े किए सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में विकसित किया गया है। उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के कुछ हिस्सों में नुकसान और मरम्मत से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई।

वायरल वीडियो में सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर मरम्मत का काम दिखाई देता है। पंखों के इस्तेमाल का दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। हालांकि, इन दृश्यों के आधार पर अकेले यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सड़क की पूरी परियोजना में निर्माण संबंधी खामी साबित हो गई है। अंतिम तस्वीर तकनीकी जांच और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।

PNC Infratech के चेयरमैन हैं प्रदीप कुमार जैन

PNC Infratech के आधिकारिक प्रबंधन विवरण के अनुसार प्रदीप कुमार जैन कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। कंपनी के मुताबिक उनके पास इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े क्षेत्रों में 43 वर्षों से अधिक का अनुभव है। प्रदीप कुमार जैन का नाम आगरा से जुड़ा रहा है और उनकी कंपनी देश के विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम करती है।

बीजेपी सांसद नवीन जैन से पारिवारिक रिश्ता

बीजेपी के राज्यसभा सांसद नवीन जैन और प्रदीप कुमार जैन के बीच पारिवारिक संबंध भी सार्वजनिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों में दर्ज हैं। 2024 में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने नवीन जैन को उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार बनाया था। इससे पहले वह आगरा के मेयर रह चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदीप कुमार जैन, नवीन जैन के बड़े भाई हैं। PNC के प्रमोटर परिवार में दोनों के नाम लंबे समय से जुड़े रहे हैं।

2024 में CBI जांच से भी जुड़ा PNC का नाम

PNC Infratech इससे पहले भी CBI की एक भ्रष्टाचार जांच के चलते चर्चा में आ चुकी है। जून 2024 में CBI ने मध्य प्रदेश में NHAI से जुड़े एक मामले में कथित 10 लाख रुपये की रिश्वत के आरोपों की जांच शुरू की थी। मामले में NHAI अधिकारियों के साथ PNC Infratech के कुछ कर्मचारियों के नाम भी सामने आए थे।

कंपनी ने 10 जून 2024 को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में CBI द्वारा अपने अधिकारियों और कार्यालयों में तलाशी की पुष्टि की थी। दिल्ली हाईकोर्ट के 2024 के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि CBI ने 8 जून 2024 को FIR दर्ज की थी और 8 अगस्त 2024 को चार्जशीट दाखिल की गई। हालांकि, अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार उस समय तक आरोप तय नहीं हुए थे। (

एक्सप्रेसवे विवाद और CBI मामले को अलग-अलग देखना जरूरी

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति और 2024 की CBI जांच दो अलग-अलग मामले हैं। मौजूदा सड़क विवाद में निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि CBI मामला कथित रिश्वत और NHAI से जुड़े प्रोजेक्ट से संबंधित है। इसलिए किसी एक मामले को दूसरे का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। एक्सप्रेसवे की वास्तविक स्थिति पर निष्कर्ष तकनीकी जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेही किसकी?

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे देश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में सड़क के शुरुआती दौर में ही क्षति या मरम्मत के दृश्य सामने आने से स्वाभाविक रूप से निर्माण गुणवत्ता, निगरानी, रखरखाव और ठेकेदार की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित एजेंसियों की तकनीकी जांच में क्या सामने आता है और सड़क की मरम्मत एवं गुणवत्ता को लेकर क्या आधिकारिक कार्रवाई की जाती है।

 

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