उत्तर प्रदेश में अब 2017 बैच के आईएएस अधिकारियों को जनपदों में जिलाधिकारी के रूप में तैनाती दी गई है। यह कोई नई बात नही यह तैनाती नियुक्ति विभाग द्वारा एक नियमानुसार प्रक्रिया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिलाधिकारी के रूप में तैनात होने से पहले मुख्य विकास अधिकारी एवं प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के रूप में तथा नगर निगम में आयुक्त के पद पर निष्ठा एवं ईमानदारी से कार्य किया है तो सरकार को प्राथमिकता में लेना चाहिए।
लेकिन 2017 बैच के कुछ अधिकारियों ने अपने पदों पर रहते हुये भ्रष्टाचार कमीशनखोरी में लगातार लिप्त रहे और जनसमस्याओं के निराकरण से दूर रहे। ऐसे अधिकारियों को निश्चित रूप से सरकार को महत्वपूर्ण हीन पदों पर तैनात किया जाना चाहिए। अब जबकि सरकार 2017 बैच के आईएएस अधिकारियों को जिलाधिकारी बना रही है उसमें से उपरोक्त बैच के ऐसे व्यक्ति को जिलाधिकारी बनाने की तैयारी हो रही है जो भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को पार कर गया है। उसे हर कार्यो में मोटा कमीशन चाहिये। निश्चित रूप से मुख्यमंत्री एवं नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज को इस पर संज्ञान लेना चाहिये।