नोएडा प्राधिकरण द्वारा शहर में जारी विकास और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में 6 अगस्त 2026 को नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) श्री एस.पी. सिंह ने वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान वर्क सर्किल-3 के वरिष्ठ प्रबंधक श्री आर.के. शर्मा, टेक्निकल ऑडिट सेल के वरिष्ठ प्रबंधक श्री राजकमल सिंह और टी.ए.सी. (TAC) की टीम उपस्थित रही।
निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से दो प्रमुख परियोजनाओं की जांच की गई:
सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहा फुटओवर ब्रिज (स्कॉयवॉक): यहां निर्माण कार्य में SAIL स्टील का उपयोग होता पाया गया। सेक्टर-50 और सेक्टर-50-51 के मध्य आर.सी.सी. नाले का निर्माण: यहां Eurotherm (राठी स्टील) और SAIL स्टील का उपयोग किया जा रहा था।

प्राधिकरण ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है:
सैंपल टेस्टिंग: टेक्निकल ऑडिट सेल को निर्देश दिया गया है कि दोनों निर्माण स्थलों से स्टील के सैंपल एकत्र कर उनकी जांच IIT दिल्ली, IIT रुड़की या श्रीराम इंस्टीट्यूट जैसे देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से कराई जाए।
भुगतान पर रोक: जब तक इन प्रयोगशालाओं से स्टील की गुणवत्ता रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक संबंधित ठेकेदारों के भुगतान पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: यदि जांच में स्टील की गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंधक से 3 दिन में जवाब तलब: घटिया या निम्न-गुणवत्ता वाले स्टील के उपयोग की संभावना और इस लापरवाही को देखते हुए संबंधित प्रबंधक को 3 कार्यदिवसों (Working Days) के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
अन्य सभी प्रोजेक्ट्स के लिए गाइडलाइंस: वर्क सर्किल 1 से 5 के सभी वरिष्ठ प्रबंधकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि उनके क्षेत्रों में चल रहे या प्रस्तावित कार्यों में सीमेंट, स्टील और बिटुमेन जैसी निर्माण सामग्रियों का उपयोग केवल गुणवत्ता मानकों के तहत ही हो।
भविष्य के लिए जवाबदेही तय: किसी भी परियोजना का भुगतान IIT या श्रीराम इंस्टीट्यूट से सामग्री की जांच और स्वीकृति मिलने के बाद ही किया जाएगा। यदि भविष्य में इस प्रक्रिया में कोई ढिलाई पाई गई, तो संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।