1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को दिया मानवीय न्याय का संदेश

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को दिया मानवीय न्याय का संदेश

लखनऊ में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने न्यायिक फैसलों के सामाजिक और मानवीय प्रभाव को समझने, महिलाओं-बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने तथा बाल गृहों में रह रहे बच्चों की शिक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास पर ध्यान देने की अपील की।

By: Nivedita  RNI News Network
Updated:
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को दिया मानवीय न्याय का संदेश

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के 20 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों और संस्थान के 9 अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद करते हुए न्यायिक दायित्वों के निर्वहन, संवेदनशीलता और फैसलों के सामाजिक प्रभाव को लेकर मार्गदर्शन दिया।

न्याय सिर्फ फैसला सुनाने तक सीमित नहीं: राज्यपाल

प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया केवल निर्णय देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। किसी फैसले का संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार के जीवन पर क्या असर पड़ता है, इसे भी समझना जरूरी है। उन्होंने न्यायिक मामलों के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार बहुत अधिक उम्र के लोग भी लंबे समय तक जेल में रहते हैं। आजीवन कारावास जैसे मामलों में सजा, उम्र और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से व्यवस्था पर विचार किए जाने की आवश्यकता है।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में सतर्कता की जरूरत

राज्यपाल ने महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों में तथ्यों की गहन जांच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दहेज या अन्य मामलों में प्राथमिकी दर्ज करते समय कभी-कभी परिवार के कई सदस्यों के नाम शामिल हो जाते हैं, जबकि उनमें से कुछ लोग घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं होते। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष और गंभीर जांच के बाद न्यायोचित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

पॉक्सो मामलों में पुनर्वास पर भी ध्यान देने की अपील

पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि केवल दंड देना ही पर्याप्त नहीं है। फैसला होने के बाद बच्चे और उसके परिवार की परिस्थितियों को समझना तथा आवश्यकतानुसार काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के जिम्मेदार और वरिष्ठ लोग भी बच्चों को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

बाल गृह और संप्रेषण गृहों का भ्रमण करने की सलाह

आनंदीबेन पटेल ने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को राजकीय बाल गृह और संप्रेषण गृहों का दौरा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी यह समझने का प्रयास करें कि किसी मामले में निर्णय के बाद संबंधित बच्चे या परिवार किन परिस्थितियों से गुजरता है। राज्यपाल ने अपने विभिन्न बाल गृह भ्रमणों के अनुभव भी साझा किए और बच्चों के खान-पान, शिक्षा, रहन-सहन तथा अन्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी लेने की बात बताई।

शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश के राजकीय बाल गृहों को विश्वविद्यालयों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षकों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने जन भवन में बालिकाओं को कत्थक, भरतनाट्यम, स्केटिंग, बांसुरी वादन, बैंड, पाक-कला सहित विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी। इसके अलावा 16 बच्चों को जन भवन विद्यालय में शिक्षा दिए जाने का भी उल्लेख किया।

व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए बढ़ाया जा रहा आत्मविश्वास

राज्यपाल ने बताया कि कुछ जनपदों में राजकीय बाल गृहों के बच्चों को होटल मैनेजमेंट, नर्सिंग और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। जन भवन में बच्चों को अग्निवीर की तैयारी से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की भी जानकारी उन्होंने साझा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने से उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ सकेंगे।

सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी जरूरी

राज्यपाल ने स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के जिम्मेदार लोगों को ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने गुजरात में महिलाओं की समितियों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के समाधान के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार लोगों की समितियां बनाकर लगातार संवाद किया जाए तो कई सामाजिक समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।

निदेशक रेखा अग्निहोत्री को भेंट की पुस्तकें

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संस्थान की निदेशक रेखा अग्निहोत्री को ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’, ‘हमारा राज भवन’, ‘आंगनबाड़ी मेरी आत्मा’, ‘टीबी उन्मूलन’ और ‘राज भवन बैण्ड’ सहित विभिन्न पुस्तकें भेंट कीं। कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार सुनील कुमार वर्मा भी उपस्थित रहे।

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें गूगल न्यूज़, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...