उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव S P Goyal की अध्यक्षता में नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) से वित्त पोषित परियोजनाओं को लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 की हाई पावर कमेटी की चतुर्थ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में तृतीय समीक्षा के बाद हुई प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे नाबार्ड को प्रतिपूर्ति दावे, परियोजना स्वीकृति प्रस्ताव तथा परियोजना पूर्णता प्रमाणपत्र (PCR) समयबद्ध रूप से प्रेषित करें। उन्होंने नाबार्ड और कार्यदायी विभागों के बीच बेहतर आपसी समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि समय पर दस्तावेज भेजने से परियोजनाओं की गति और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेगी।
बैठक में Project Yet to be Grounded (PYG) और Slow Moving Projects (SMP) की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं का विस्तृत ब्योरा नाबार्ड को भेजने और लंबित कारणों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि तय लक्ष्यों को समय पर प्राप्त किया जा सके।

यह भी निर्णय लिया गया कि सभी कार्यदायी विभाग अपनी-अपनी परियोजनाओं की Quarterly Progress Report (QPR) नियमित रूप से नाबार्ड को भेजेंगे, जिससे परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके और किसी भी स्तर पर देरी को समय रहते दूर किया जा सके।
बैठक से पहले नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक Pankaj Kumar ने जानकारी दी कि वर्तमान में नाबार्ड की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार की स्वीकृत परियोजनाओं के सापेक्ष 3000 करोड़ रुपये के ऋण संवितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1751 करोड़ रुपये विभिन्न कार्यदायी विभागों को वितरित किए जा चुके हैं।
इस समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन Mukesh Kumar Meshram, प्रमुख सचिव सिंचाई Anil Garg, प्रमुख सचिव लोक निर्माण Ajay Chauhan, सचिव वित्त Sandeep Kaur सहित विभिन्न कार्यदायी विभागों के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। नाबार्ड, उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से भी मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार समेत अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए।