वाराणसी के सेवापुरी ब्लॉक स्थित हरिभानपुर गांव में मनरेगा के तहत एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। सरकारी दस्तावेजों में जहां 8 तालाबों के निर्माण का दावा किया गया है, वहीं मौके पर जांच करने पर यह पूरी तरह फर्जी पाया गया। जिन स्थानों पर तालाब दिखाए गए हैं, वहां आज भी खाली, ऊबड़-खाबड़ जमीन और खेत मौजूद हैं।
इस कथित घोटाले में करीब 15 लाख 27 हजार रुपये के गबन का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायती राज और मनरेगा से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना काम कराए ही पूरी राशि निकाल ली गई। इससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जब इस मामले की जांच के लिए ‘यूपी की बात’ की टीम ब्लॉक कार्यालय पहुंची, तो संबंधित अधिकारियों ने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। खंड विकास अधिकारी (VDO) की चुप्पी ने इस पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना दिया है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह का भ्रष्टाचार उच्च स्तर की मिलीभगत के बिना संभव है।
हालांकि, संबंधित मनरेगा अधिकारी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं मौके पर जाकर पूरे प्रकरण की जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण के लिए ‘अमृत सरोवर’ जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के फर्जी कार्यों से सरकारी धन की लूट हो रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।