लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन में केंद्र की शासी निकाय की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सांस्कृतिक केंद्र की मौजूदा गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों और भारतीय कला-संस्कृति को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक संस्थानों को स्थानीय और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने युवा कलाकारों और प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की लोक एवं पारंपरिक कलाओं को बच्चों तक पहुंचाने के लिए नियमित और प्रभावी कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने बच्चों को देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के लिए विशेष नाट्य कार्यक्रम तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के जीवन एवं योगदान पर आधारित नाटक तैयार किए जाएं। इन नाटकों का विभिन्न विद्यालयों में मंचन कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थी देश के स्वतंत्रता आंदोलन और वीर सेनानियों के योगदान को रोचक एवं प्रभावी तरीके से समझ सकें। जन भवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए गए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों के लिए छुट्टियों के दौरान उनकी रुचि के अनुरूप कौशल और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने गीत, संगीत और गायन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण के जरिए बच्चों की प्रतिभा को निखारने पर जोर दिया। इसके अलावा विद्यार्थियों को संग्रहालयों, ऐतिहासिक स्थलों और अन्य ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक स्थानों का भ्रमण कराने की आवश्यकता भी बताई गई, ताकि उन्हें किताबी ज्ञान के साथ प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।
बैठक में राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में रचनात्मक क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उनकी रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही मंच उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की भागीदारी के उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे नाटक, कहानी, भाषण और चित्रकला जैसे माध्यमों से पर्यावरण और जल संरक्षण सहित सामाजिक विषयों पर प्रभावी संदेश दे सकते हैं।
राज्यपाल ने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की गतिविधियों को अधिक व्यापक बनाने और बच्चों, युवाओं तथा महिलाओं को इससे जोड़ने के निर्देश दिए। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के सहयोग से नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। उन्होंने महिला सशक्तिकरण से संबंधित विशेष कार्यक्रमों को भी केंद्र की गतिविधियों में शामिल करने के निर्देश दिए।

बैठक में भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति में 1 से 15 नवंबर तक प्रस्तावित कार्यक्रमों में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की सहभागिता पर भी चर्चा हुई। संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर इन दिनों प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना पर विचार किया गया। राज्यपाल ने प्रत्येक कार्यक्रम के बाद उसकी समीक्षा और संबंधित भुगतान एवं देयकों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने केंद्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और प्रभावी अनुश्रवण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी कार्य के लिए निर्देश जारी होने के बाद उसकी प्रगति की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। लंबित न्यायिक मामलों की भी लगातार निगरानी और नियुक्त अधिवक्ताओं के माध्यम से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्यपाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए केंद्र के प्रयासों की सराहना की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित कार्यक्रमों को मंजूरी दी गई। केंद्र में रिक्त पदों को नियमानुसार भरने की स्वीकृति भी प्रदान की गई।
राज्यपाल ने केंद्र परिसर की स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा समिति की बैठक कराने को कहा। पेयजल टंकियों और अन्य जल स्रोतों की नियमित सफाई, पानी की गुणवत्ता की जांच, टीडीएस की निगरानी और उसका रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही परिसर की स्वच्छता व्यवस्था का त्रैमासिक निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट फोटोग्राफ सहित राज्यपाल को उपलब्ध कराने को कहा गया। बैठक में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित कर लंबित एवं प्रस्तावित कार्यों को नियमानुसार आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।