गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोरखपुर में आयोजित राम कथा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु परंपरा, भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से है। मुख्यमंत्री ने परिवार, संस्कार और युवा पीढ़ी की जिम्मेदारियों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। गुरु वह है, जिससे जीवन में कुछ सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक, बड़े भाई और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी लोग गुरु के समान सम्माननीय होते हैं।
सीएम योगी ने भगवान वेदव्यास का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने वेदों को व्यवस्थित करने और पुराणों की रचना में महर्षि वेदव्यास के योगदान को अतुलनीय बताया। मुख्यमंत्री ने प्राचीन पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों और ज्ञान की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इन्हें सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सदियों से सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित राष्ट्र रहा है। उन्होंने पर्व और त्योहारों को समाज को जोड़ने वाला माध्यम बताया। सीएम योगी ने कहा कि देश में भाषा, खान-पान और रहन-सहन की विविधता होने के बावजूद सांस्कृतिक चेतना सभी को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने समाज से अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल उपयोग पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। परिवार को मिलकर बच्चों के बेहतर विकास के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कार, अनुशासन और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की नींव होता है और मजबूत परिवार से ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।