गोरखपुर को पर्यटन के क्षेत्र में एक और बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिलुआताल पर्यटन विकास परियोजना के प्रथम चरण का लोकार्पण करते हुए इसे पूर्वांचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। लगभग 20.39 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस परियोजना के तहत चिलुआताल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जिस चिलुआताल क्षेत्र की कभी उपेक्षा होती थी, वही आज पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा का नया केंद्र बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में इस जलाशय के विकास की शुरुआत की गई थी। फर्टिलाइजर कारखाने की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तालाब का गहरीकरण कराया गया और उसके साथ पर्यटन विकास की योजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया।


योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चिलुआताल का जल पूरी तरह प्राकृतिक है और इसकी विशेषताओं को देखते हुए इसे वॉटर स्पोर्ट्स और इको-टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रामगढ़ताल की तर्ज पर यहां भी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। आने वाले समय में यहां नौकायन, वॉटर स्पोर्ट्स, मनोरंजन गतिविधियां, खरीदारी केंद्र और अन्य पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तालाबों और पोखरों पर अतिक्रमण होता था, लेकिन अब डबल इंजन सरकार इन जल स्रोतों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए व्यापक अभियान चला रही है। उन्होंने चिलुआताल को गोरखपुर की नई पहचान बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने चिलुआताल और रामगढ़ताल के आसपास व्यापक वृक्षारोपण तथा योग कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने बताया कि चिलुआताल क्षेत्र में 20 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने का भी आग्रह किया।