Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शिक्षक शिक्षा, बच्चों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं। बता दें उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद, शिक्षा मंत्रालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय उत्तरी क्षेत्रीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव 2026 के समापन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा, शिक्षकों की जवाबदेही, बच्चों की सुरक्षा और रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष जोर दिया।
जानकारी के लिए बता दें राज्यपाल ने यह भी कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की मजबूत नींव है। इसके लिए शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना होगा।
आनंदीबेन पटेल का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों को उनकी परिचित भाषा में पढ़ने और सीखने के अवसर मिलने चाहिए। मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों को विषयों को समझने, सवाल पूछने और अपने विचार व्यक्त करने में मदद मिलती है। साथ ही, उन्होंने विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मातृभाषा आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि मातृभाषा को प्राथमिकता देने का अर्थ दूसरी भाषाओं से दूरी बनाना नहीं है।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष या उससे अधिक आयु का मानक निर्धारित किया गया है। छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए बालवाटिका और आंगनबाड़ी के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। जिसके बाद उन्होंने आदेश दिया कि विद्यालयों में बच्चों का ड्रॉपआउट नहीं होना चाहिए। इसके लिए नियमित सर्वेक्षण और सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति में योग्यता, शोध कार्य, शिक्षण की गुणवत्ता और संस्थान के विकास में योगदान को महत्व मिलना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में बेटियों सहित सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ भाषा, आर्थिक स्थिति, सामाजिक पृष्ठभूमि या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
आनंदीबेन पटेल ने कौशल आधारित शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ शैक्षणिक संस्थानों के समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालयों से संबंधित तकनीकों पर शोध और पाठ्यक्रम तैयार करने को कहा है। जिसमें उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। कॉन्क्लेव के समापन पर उन्होंने आयोजकों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों को बधाई दी है।
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