आगरा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में आयोजित दो दिवसीय उत्तरी क्षेत्रीय नेशनल कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास, प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर चर्चा की जा रही है। इसमें उत्तर भारत के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना और राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक (NPST) तथा राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित पक्षों को तैयार करना है। कार्यक्रम में चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बदलते समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें नई तकनीकों, आधुनिक शिक्षण विधियों और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों के अनुसार अपने कौशल को लगातार विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक अपने ज्ञान, व्यवहार और मार्गदर्शन से अनेक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और शिक्षकों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक (NPST) और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM) की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं को मजबूत करने और अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान का लाभ अन्य शिक्षकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने मेंटरिंग इनिशिएटिव्स फॉर टीचिंग, रिसर्च एंड असेसमेंट (MITRA) के डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों से शिक्षकों को उनकी जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन मिल सकता है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को भी विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बच्चों की शिक्षा की मजबूत नींव भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता और गणित की बुनियादी समझ से तैयार होती है। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को सरल और सहज तरीके से पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सीखने की प्रक्रिया उनके लिए रुचिकर बने। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की अलग-अलग क्षमताओं और सीखने की गति को समझने की अपील की। उनके अनुसार, बच्चों को केवल रटाने के बजाय उनकी समझ, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान दौर में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षण सामग्री, ऑनलाइन संसाधनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उपकरणों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना आवश्यक है। इसके साथ शिक्षकों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, नैतिक मूल्यों और संवेदनशीलता का विकास भी होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की चुनौतियों को समझकर उन्हें उचित प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
कॉन्क्लेव के दौरान राज्यपाल ने ललित कला संस्थान और इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस के फैमिली रिसोर्स मैनेजमेंट विभाग की ओर से आयोजित हुनर हाट प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की सराहना की और अपनी पसंद से रेशम के धागों के कंगन, मिट्टी के दीये तथा मंडला आर्ट की पेंटिंग खरीदी।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, प्रभावी शिक्षण, विषयों पर अच्छी पकड़ और विद्यार्थियों की जरूरतों को समझना जरूरी है। उन्होंने शिक्षक शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता, प्रशिक्षण और जवाबदेही को मजबूत करने पर भी बल दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, शिक्षक व्यावसायिक मानक और मेंटरिंग से जुड़ी पहलें शिक्षकों को सशक्त बनाने में मदद करेंगी। इससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान मिलेगा।