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महिला सशक्तिकरण के लिए परिवार की सोच में बदलाव जरूरी: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ में ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक पर आयोजित परिचर्चा में महिला सशक्तिकरण, बेटियों की शिक्षा, समान अवसर, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। राज्यपाल ने परिवार और समाज की सोच में बदलाव को महिला सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी बताया।

By: Nivedita  RNI News Network
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महिला सशक्तिकरण के लिए परिवार की सोच में बदलाव जरूरी: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक पर परिचर्चा कार्यक्रम में सहभागिता की। यह पुस्तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य एवं समाजसेविका डॉ. शोभा विजेन्द्र ने लिखी है। कार्यक्रम में राज्यपाल ने पुस्तक की लेखिका को महिलाओं की सामाजिक भूमिका और सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषय को केंद्र में रखकर लेखन करने तथा देशभर में इस विषय पर संवाद को आगे बढ़ाने के लिए शुभकामनाएं दीं।

महिलाओं की भागीदारी के बिना देश का पूर्ण विकास संभव नहीं

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। समाज की आधी आबादी को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर ही समग्र और संतुलित विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्थिति में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है। परिवार और समाज की सोच में परिवर्तन के साथ महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के नए अवसर खुले हैं।

 

महिला सशक्तिकरण के लिए परिवार की सोच में बदलाव जरूरी: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

महिला सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी परिवार

राज्यपाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की वास्तविक शुरुआत परिवार से होती है। उन्होंने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके पिता बेटियों की शिक्षा को लेकर बेहद जागरूक थे। उन्होंने कहा कि यदि परिवार यह संकल्प कर ले कि बेटी को पढ़ाना और आगे बढ़ाना है, तो परिस्थितियां धीरे-धीरे उसके अनुकूल बनती जाती हैं। इसलिए बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर परिवार की सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण है।

बेटियों को समान अवसर देने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर मिलना चाहिए। शिक्षा, प्रतिभा विकास और आगे बढ़ने के अवसरों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति भेदभाव की मानसिकता को समाप्त करने के लिए सामाजिक सोच में निरंतर बदलाव आवश्यक है। यह बदलाव शिक्षा, अनुभव और जागरूकता के माध्यम से ही संभव है।

 

महिला सशक्तिकरण के लिए परिवार की सोच में बदलाव जरूरी: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

विश्वविद्यालयों से जुड़ रहे गांव, बच्चों को मिल रहा मंच

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा गांवों को गोद लेकर किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक राज्य विश्वविद्यालय ने पांच गांवों को गोद लिया है। इन गांवों के बच्चों को विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में सांस्कृतिक और प्रेरक प्रस्तुतियां देने का अवसर मिल रहा है। शिक्षकों द्वारा बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास ग्रामीण बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने और उनकी प्रतिभा को उचित मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिक्षा, स्टार्टअप और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही बेटियां

राज्यपाल ने कहा कि आज बेटियां शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या भी काफी दिखाई देती है। उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक टिप्पणियों की परवाह किए बिना सही सोच और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

आर्थिक आत्मनिर्भरता से मजबूत होगा महिला सशक्तिकरण

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने गुजरात में महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अपने कार्यकाल का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले कई महिलाओं के पास जमीन या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती थी। व्यवस्था में बदलाव कर महिलाओं के नाम संपत्ति संबंधी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं को ऋण प्राप्त करने में सुविधा हुई और वे अपने व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने लगीं। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं के व्यवसाय संचालित कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

‘ड्रोन दीदी’ से कृषि क्षेत्र में महिलाओं की नई भूमिका

राज्यपाल ने ‘ड्रोन दीदी’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण महिलाओं के लिए भी नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाएं ड्रोन के माध्यम से कृषि कार्यों में बीज और दवाओं के छिड़काव जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ कृषि क्षेत्र में उनकी भूमिका भी मजबूत हो रही है।

महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत

राज्यपाल ने महिला सशक्तिकरण के साथ उनके स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारियों के कारण महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं।उन्होंने 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर जोर दिया। साथ ही ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर जांच और उपचार को आवश्यक बताया।

बेटियों के HPV टीकाकरण के लिए जागरूकता का आह्वान

राज्यपाल ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV टीकाकरण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से अपनी बेटियों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए HPV वैक्सीन के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में HPV टीकाकरण को लेकर चलाए गए जागरूकता और टीकाकरण प्रयासों का भी उल्लेख किया तथा लोगों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की।

नशामुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका

राज्यपाल ने नशामुक्त समाज बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने पूर्वांचल की महिलाओं द्वारा संचालित ‘ग्रीन आर्मी’ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि ये महिलाएं नशामुक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे रही हैं। नदी में स्नान के दौरान छोड़े गए कपड़ों को एकत्र कर उनकी सफाई और सिलाई के माध्यम से उपयोगी उत्पाद तैयार करने जैसे प्रयास महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद कर रहे हैं।

संघ की शताब्दी यात्रा और महिलाओं की सहभागिता

राज्यपाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा के संदर्भ में महिलाओं की भूमिका को समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि संघ की यात्रा को समझने के साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सहभागिता पर भी चर्चा जरूरी है। उन्होंने गुजरात में अपने सार्वजनिक जीवन के दौरान संघ से जुड़े अनेक लोगों के साथ हुए संवाद और उनके सामाजिक कार्यों को करीब से देखने के अनुभव भी साझा किए। राज्यपाल ने विद्या भारती के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए संस्कृत शिक्षा और योग को बढ़ावा देने के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की चर्चा की।

विधानसभा अध्यक्ष ने मातृशक्ति के योगदान को बताया महत्वपूर्ण

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना ने कहा कि संघ से जुड़े कार्यों में मातृशक्ति की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनकी मां संघ के स्वयंसेवकों और प्रचारकों के प्रति सम्मान और आत्मीयता रखती थीं। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज को साथ लेकर चलने में महिलाओं का सहयोग महत्वपूर्ण शक्ति प्रदान करता है।

महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने के अवसर मिलें: बेबी रानी मौर्य

महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने कहा कि महिलाएं परिवार के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की भी महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज लगभग हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने के साथ नेतृत्व करने और निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि महिला सहभागिता समाज की प्रगति का मजबूत आधार है।

पुस्तक पर आधारित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन

कार्यक्रम में ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ विषय पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। फिल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा, महिलाओं की सहभागिता, मातृशक्ति के सम्मान और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के योगदान को दर्शाया गया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल को ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक तथा स्मृति चिह्न भेंट किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शोभा विजेन्द्र, राष्ट्रीय सेविका समिति की क्षेत्रीय प्रचारिका सुश्री शशि, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अर्पणा बिष्ट, सुश्री निदर्शना गोवानी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

 

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