लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल से जन भवन के गांधी सभागार में भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा-यातायात (IRMS-Traffic) के वर्ष 2022 और 2023 बैच के 51 प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इनमें 14 महिला प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल रहीं। लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान (IRITM) में प्रशिक्षण ले रहे ये अधिकारी अपने प्रशिक्षण के अंतिम चरण में हैं।
मुलाकात के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया। प्रशिक्षु अधिकारी आकांक्षा गुप्ता और आकांक्षा सिंह ने IRITM में प्रशिक्षण के दौरान मिले अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें भारतीय रेल की कार्यप्रणाली, प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था के अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
प्रशिक्षु अधिकारी पूर्णिमा सूदन ने राज्यपाल से उनकी हाल की रेल यात्रा के अनुभव के बारे में सवाल किया। राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए भारतीय रेल की व्यवस्थाओं की सराहना की। साथ ही उन्होंने स्वच्छता और रेलवे कर्मचारियों से जुड़ी कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की ओर प्रशिक्षु अधिकारियों का ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं में लगातार सुधार के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल से उनके सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक अनुभवों को लेकर भी सवाल किए। मंगेरा कौशिक भानुभाई ने गुजरात में शिक्षिका के रूप में शुरुआत से लेकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने तक की यात्रा में शिक्षा, संस्कार और संस्कृति की भूमिका के बारे में जानकारी मांगी। वहीं डॉ. आकांक्षा ने पूछा कि कागजों पर तैयार नीतियों को प्रभावी तरीके से धरातल पर लागू करने के लिए प्रशासन को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रशिक्षु अधिकारियों के सवालों के जवाब देते हुए अपने सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी नीति या योजना को सफल बनाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, दृढ़ इच्छाशक्ति, जमीनी परिस्थितियों की समझ और लगातार निगरानी आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को समझाया कि जरूरत पड़ने पर कठिन निर्णय लेने का साहस भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। किसी योजना की वास्तविक सफलता तभी मानी जानी चाहिए, जब उसका लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए उसे तैयार किया गया है।
राज्यपाल ने युवा अधिकारियों को प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समस्याओं को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित रखने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए और समाधान केंद्रित तरीके से काम करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को जन भवन के संग्रहालय और वाटिका का भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान अधिकारियों ने जन भवन से जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना।
कार्यक्रम में IRITM के प्रोफेसर (वित्त) अष्टानन्द पाठक ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने उनके ग्रामीण परिवेश में बीते बचपन, शिक्षा के लिए किए गए संघर्ष और शिक्षिका के रूप में सामाजिक सरोकारों से जुड़ने के साथ उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा को विस्तार से बताया। उन्होंने संगठनकर्ता, जनप्रतिनिधि, मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के रूप में आनंदीबेन पटेल की भूमिका के विभिन्न पड़ावों को भी प्रशिक्षु अधिकारियों के सामने रखा।
अष्टानन्द पाठक ने राज्यपाल के जीवन प्रसंगों के जरिए प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि परिस्थितियां किसी व्यक्ति की संभावनाओं को सीमित नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और सही निर्णय लेने की क्षमता कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदल सकती है। इस दौरान युवा अधिकारियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने, निरंतर सीखने और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा दी गई।
कार्यक्रम के अंत में भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक रंजन प्रकाश ठाकुर ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को ‘बच्चों की सर्वश्रेष्ठ कहानियां’ पुस्तक और स्मृति-चिह्न भेंट किया। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में हुआ यह संवाद प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए प्रशासनिक अनुभवों को करीब से समझने का अवसर बना। राज्यपाल के साथ बातचीत के दौरान उन्हें यह संदेश मिला कि लोकसेवा में पद से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और किसी निर्णय से अधिक महत्वपूर्ण उसका जनहित में दिखाई देने वाला परिणाम है।