प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वां दीक्षांत समारोह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। समारोह के दौरान राज्यपाल ने 30,886 उपाधियों एवं अंक प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 18 मेधावी विद्यार्थियों को 26 पदकों से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह विद्यार्थियों की मेहनत, प्रतिभा और उपलब्धियों को सम्मान देने का मंच भी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अब छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि उपाधि प्राप्त करना शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अवसरों का इंतजार करने के बजाय नए अवसरों का निर्माण करें और अपने ज्ञान व कौशल का उपयोग समाज तथा देश के विकास में करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जीवन कौशल, नवाचार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना होगा।
दीक्षांत समारोह के अवसर पर फतेहपुर और प्रतापगढ़ जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 500 आंगनबाड़ी किट प्रदान की गईं। इनमें फतेहपुर के 300 और प्रतापगढ़ के 200 केंद्र शामिल हैं। राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में अब तक 66,643 आंगनबाड़ी केंद्रों को आवश्यक किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा फतेहपुर और प्रतापगढ़ में 900 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया है।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा और कक्षा छह से कौशल आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में रोजगारपरक कौशल, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, जिससे युवा बदलती जरूरतों के अनुसार स्वयं को तैयार कर सकें।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा उपाधियों को डिजीलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन रही है। उन्होंने समर्थ पोर्टल के उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में इसके माध्यम से संसाधनों की बचत और प्रशासनिक कार्यों में सुधार हुआ है।
राज्यपाल ने समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों को भी शिक्षा, संसाधन और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी माता के नाम पर पौधा लगाने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिवार और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के साथ-साथ सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति के लिए कमियों को स्वीकार कर उनका समाधान करना जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों में स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही यमुना परिसर में भूमि कटाव की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्रों की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सभी केंद्रों को विद्यार्थियों के हित में अधिक जिम्मेदार और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने आधुनिक तकनीक और स्मार्ट बोर्ड जैसे संसाधनों का बेहतर उपयोग कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर बल दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पद्मश्री सम्मानित लोकगायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी के योगदान की राज्यपाल ने सराहना की। उन्होंने कहा कि मालिनी अवस्थी ने भारतीय लोक संस्कृति, विशेष रूप से अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल की परंपराओं को देश-विदेश में पहचान दिलाने का कार्य किया है।
समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में संचालित सामाजिक गतिविधियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को पुस्तकें वितरित की गईं। स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समारोह को आकर्षक बनाया, जिसकी राज्यपाल ने सराहना करते हुए प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कृत किया। राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय परिवार गुणवत्ता, पारदर्शिता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय को देश के प्रमुख मुक्त विश्वविद्यालयों में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।