उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नए मंत्रियों को विभाग आवंटित नहीं किए गए हैं। इस देरी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सबसे ज्यादा चर्चा लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर विकास और डिप्टी सीएम के विभागों को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि इन अहम मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर दिल्ली आलाकमान और लखनऊ के बीच सहमति बनने में समय लग रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला केवल मंत्रालयों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और संगठन के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी जारी है। भाजपा नेतृत्व 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए हर फैसले को राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के हिसाब से संतुलित करना चाहता है। यही वजह है कि विभाग आवंटन का अंतिम फार्मूला अभी तक तय नहीं हो पाया है।
विशेष रूप से PWD विभाग को लेकर अंदरखाने कई स्तरों पर चर्चा चल रही है। वर्ष 2022 में सरकार बनने के बाद यह विभाग जितिन प्रसाद को दिया गया था, लेकिन 2024 में उनके केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद से यह विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री इस महत्वपूर्ण विभाग को अपने पास ही रखेंगे या फिर किसी नए कैबिनेट मंत्री को सौंपेंगे।
इसके अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के विभागों में संभावित फेरबदल की चर्चा भी जोरों पर है। सूत्रों का दावा है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व डिप्टी सीएम को बड़े और प्रभावशाली विभाग देने के पक्ष में है। साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को भी बड़ा मंत्रालय देने की चर्चा है। हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेना है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री फिलहाल गोरखपुर में हैं और रविवार शाम या सोमवार तक विभागों के बंटवारे को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इस देरी पर तंज कस रहे हैं। उन्होंने विभागों के बंटवारे में हो रही देरी को “डबल इंजन के डब्बों का टकराव” बताया और कहा कि “दिल्ली की पर्ची अभी आई नहीं है, इसलिए मंत्री इंतजार कर रहे हैं।”
पहले मंत्रिमंडल विस्तार में हुई देरी और अब विभागों के आवंटन में बढ़ते इंतजार ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है |