झांसी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी का 31वां दीक्षोत्सव संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 34,947 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 20,295 छात्राएं और 14,652 छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम में 81 पदक वितरित किए गए, जबकि 83 विद्यार्थियों को शोध उपाधियां प्रदान की गईं।कुलाधिपति स्वर्ण पदकों में छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया। कुल स्वर्ण पदकों में 80 प्रतिशत छात्राएं और 20 प्रतिशत छात्र रहे। विद्यार्थियों की उपाधियां और अंक पत्र डिजिलॉकर पर अपलोड किए गए।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत दीक्षोत्सव के अवसर पर झांसी के 300, ललितपुर के 200, महोबा के 200 और चित्रकूट के 200 सहित कुल 900 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट प्रदान की गईं। इस अभियान के तहत प्रदेश में अब तक 75,893 आंगनबाड़ी केंद्र लाभान्वित हो चुके हैं।

इसी तरह राज्यपाल के एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत झांसी, ललितपुर, महोबा और चित्रकूट की 300-300 बेटियों, यानी कुल 1,200 बेटियों का HPV टीकाकरण किया गया। इनमें पुलिस कर्मियों की बेटियां भी शामिल रहीं। अभियान के तहत अब तक कुल 5,95,659 HPV टीकाकरण किए जा चुके हैं।राज्यपाल ने HPV वैक्सीन कार्यक्रम के दौरान बच्चियों से संवाद किया और उन्हें टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने वॉल ऑफ फेम, पॉलीहाउस और फूड टेक्नोलॉजी भवन के विस्तारीकरण कार्य का लोकार्पण किया। उन्होंने बुंदेलखंड गौरव कला दीर्घा, स्टार्टअप आंगनबाड़ी वीथिका, चित्रकला प्रदर्शनी और विभिन्न स्टॉल का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शित गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी ली।

दीक्षोत्सव में विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि दीक्षोत्सव छात्र जीवन की दीर्घ साधना, अनुशासन, परिश्रम और ज्ञानार्जन की तपस्या पूर्ण होने के बाद राष्ट्र एवं समाज की सेवा के नए अध्याय की शुरुआत का उत्सव है।उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा, प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।राज्यपाल ने कहा कि बेटियों की सफलता पर गर्व है, लेकिन शिक्षा का उद्देश्य संतुलित, समावेशी और उत्कृष्ट समाज का निर्माण भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के साथ बेटों को भी उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। समाज में संतुलन के लिए छात्र और छात्राओं दोनों का शिक्षित और सशक्त होना जरूरी है।राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों की रुचि और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास एवं प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल भी मिलना चाहिए, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार और अधिक वेतन के अवसर मिल सकें।
राज्यपाल ने जन भवन में संचालित विद्यालय की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही शिक्षा के साथ कौशल और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।CSR सहयोग से विद्यालय में इसरो लैब स्थापित की गई है, जहां बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान और नवीनतम तकनीक से संबंधित जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच विकसित की जा रही है।विद्यालय में खेल गतिविधियों के साथ बच्चों को सेना से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पुलिसकर्मियों द्वारा बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा बच्चों को पांच प्रकार के बैंड का प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें छात्राएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।राज्यपाल ने बताया कि 26 जनवरी की परेड में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रथम पुरस्कार प्राप्त करना उनके आत्मविश्वास और प्रशिक्षण का परिणाम है।
वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित किया गया। इसके परिणामस्वरूप विद्यालय में 450 बच्चों का नामांकन कराया गया है।राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से विद्यालय में 20 प्रकार के क्लबों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों और कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।उन्होंने बच्चों में संवेदनशीलता और संस्कार विकसित करने पर भी जोर दिया। जन भवन में मौजूद करीब 40 गायों की सेवा और देखभाल से बच्चों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्यपाल ने नैक मूल्यांकन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के 38 विश्वविद्यालय नैक मूल्यांकन के लिए तैयार थे, लेकिन प्रक्रिया रुक गई थी। उन्होंने बताया कि नैक की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेश्वर राव ने प्रक्रिया को नए स्वरूप में फिर शुरू किए जाने की जानकारी दी है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को निरंतर सीखने, नवाचार करने और गुणवत्ता में सुधार के लिए तैयार रहना होगा। आज सीखी गई तकनीक के कुछ समय बाद नई तकनीक और नई आवश्यकताएं सामने आ जाती हैं। इसलिए उच्च शिक्षा संस्थानों को लगातार खुद को अपडेट करना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना है और इस लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों को पीएम-उषा के अंतर्गत करीब 780 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की कलाकृतियों के साथ पिछवाई कला को जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए। पुरानी पिछवाई कृतियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के साथ कोटा, बूंदी, किशनगढ़, नाथद्वारा और गोलकुंडा जैसी क्षेत्रीय चित्रकला शैलियों तथा मिनिएचर पेंटिंग में भी दिनेश सोनी के योगदान को उन्होंने उल्लेखनीय बताया।राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिनेश सोनी की कला का प्रदर्शन भारतीय कला एवं संस्कृति की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है। उन्होंने उनकी कला-साधना, समर्पण और पारंपरिक कला-विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।