गौतमबुद्धनगर में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को जांचने के लिए राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान भूकंप, आग और केमिकल रिसाव जैसी अलग-अलग आपात परिस्थितियों का कृत्रिम परिदृश्य तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। एक्सरसाइज में प्रशासन, पुलिस, फायर विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा एजेंसियों सहित कई विभागों ने हिस्सा लिया।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर ने इस अभ्यास का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य किसी बड़ी आपदा के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित कार्रवाई और उपलब्ध संसाधनों की उपयोगिता को परखना था। मॉक ड्रिल के लिए जिले के तीन अलग-अलग क्षेत्रों का चयन किया गया, जहां अलग-अलग तरह की आपात स्थितियों को दर्शाया गया।
जेवर तहसील के नीमका स्थित रेडिसन दी स्कूल में भूकंप से जुड़ा आपदा परिदृश्य बनाया गया। यहां भूकंप के बाद फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, रेस्क्यू करने और जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अभ्यास के दौरान यह भी देखा गया कि आपदा के तुरंत बाद संबंधित टीमें कितनी तेजी से घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू कर सकती हैं।
सदर तहसील क्षेत्र स्थित शारदा हॉस्पिटल में आग लगने की आपात स्थिति को लेकर मॉक ड्रिल की गई। इसमें मरीजों और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। फायर विभाग की टीम ने आग से निपटने और लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई का अभ्यास किया। साथ ही प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को भी परखा गया।
दादरी तहसील के औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल रिसाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक अलग आपदा परिदृश्य तैयार किया गया। यहां प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने, लोगों को बाहर निकालने और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने की प्रक्रिया का अभ्यास हुआ। इस दौरान यह जांचने का प्रयास किया गया कि किसी औद्योगिक दुर्घटना की स्थिति में बचाव दल किस तरह प्रभावित क्षेत्र को नियंत्रित कर लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंच सकता है।

मॉक ड्रिल के दौरान शारदा यूनिवर्सिटी कैंपस में अस्थायी फील्ड हॉस्पिटल भी स्थापित किया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को यहां पहुंचाकर प्राथमिक उपचार और चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने का अभ्यास किया गया। इस व्यवस्था के जरिए आपदा के दौरान बड़ी संख्या में घायलों के सामने आने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की तैयारियों को भी जांचा गया।
इस राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन और पुलिस के साथ फायर विभाग, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, पीएसी, होमगार्ड, पीआरडी जवान और आपदा मित्र शामिल रहे। अभ्यास के दौरान सुरक्षित निकासी, रेस्क्यू ऑपरेशन, प्राथमिक उपचार और घटनास्थल पर त्वरित प्रतिक्रिया जैसी प्रक्रियाओं को परखा गया। विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपसी तालमेल पर भी ध्यान दिया गया।
मॉक ड्रिल का एक अहम उद्देश्य केवल तैयारियों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों की पहचान करना भी रहा। अभ्यास के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों, मानव शक्ति और राहत-बचाव की व्यवस्थाओं का आकलन किया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर वास्तविक आपदा के दौरान बेहतर तरीके से कार्रवाई की जा सके।
गौतमबुद्धनगर में आयोजित इस अभ्यास से आपात परिस्थितियों में अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत सामने आई। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में घबराने के बजाय प्रशासन और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें तथा बचाव कार्यों में सहयोग करें।