बलिया: उत्तर प्रदेश सरकार जहां नदियों के किनारे बसे गांवों को कटान और बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं बलिया जिले के बांसडीह तहसील क्षेत्र के चांदपुर गांव से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। घाघरा नदी के किनारे चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।

चांदपुर गांव में घाघरा नदी के किनारे बाढ़ विभाग द्वारा ठोकरी निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। यह कार्य नदी की कटान को रोकने और गांव को बाढ़ के खतरे से बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जहां नदी में कटान हो रहा है, वहां मिट्टी से भरी प्लास्टिक की बोरियां डालकर अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। पानी बढ़ने के बाद मिट्टी बह जाती है और केवल बोरियां दिखाई देने लगती हैं, जिससे कटान रोकने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में जो ठोकरी निर्माण किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि यदि इस वर्ष घाघरा नदी में बाढ़ आती है तो यह निर्माण कार्य भी नदी के तेज बहाव में बह सकता है। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह ठोकरी निर्माण कराया गया था, लेकिन वह नदी की कटान में बह गया। इसके अवशेष आज भी नदी में दिखाई दे रहे हैं, जिससे नदी का बहाव गांव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते मजबूत और स्थायी निर्माण कार्य नहीं किया गया तो आने वाले बाढ़ सीजन में गांव को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुरक्षा व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।
वहीं बाढ़ विभाग का दावा है कि घाघरा नदी पर किए जा रहे कार्यों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और लखनऊ स्तर से मॉनिटरिंग की जा रही है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर कहीं भी सीसीटीवी कैमरे दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कैमरे हटाकर केवल लोहे के पाइप छोड़ दिए गए हैं।
अब ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और बाढ़ सुरक्षा कार्यों को गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरा किया जाए, ताकि चांदपुर सहित आसपास के गांवों को बाढ़ और कटान से सुरक्षित रखा जा सके।