यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में जल्द ही ग्रीन हाइड्रोजन आधारित बसों का संचालन शुरू होने जा रहा है। इस पहल को एनटीपीसी दादरी की ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना के तहत विकसित किया गया है। परियोजना का उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
इस नई व्यवस्था के तहत बसें पारंपरिक डीजल ईंधन के बजाय ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित होंगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करने वाली ये बसें स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन का उदाहरण पेश करेंगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेंगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जल का उपयोग किया जाएगा, जिससे भूजल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उत्पादन होगा, जो हजारों पेड़ों के पर्यावरणीय योगदान के बराबर माना जा सकता है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों से संचालन के दौरान केवल जलवाष्प निकलती है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता। अनुमान है कि इस परियोजना से हर वर्ष लगभग 1,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह पहल स्वच्छ वातावरण और जलवायु संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
परियोजना के तहत भारत के सबसे बड़े ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशनों में से एक का विकास किया गया है। यह स्टेशन हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।
परियोजना में शामिल 12 मीटर लंबी बसों में लगभग 42 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम तक हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे बस लगभग 750 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकेगी। यह लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी उपयुक्त विकल्प साबित होगी।

ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक होगी, बल्कि भारत में भविष्य के हरित परिवहन मॉडल की मजबूत नींव भी तैयार करेगी।