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कॉलोनी की मरम्मत के लिए पास हुए बजट को डकार जाते हैं सिंचाई विभाग के अधिकारी, स्थिति बद से बदतर

सिंचाई विभाग के अधिकारी विभाग के कॉलोनी में रहने वालों की जान की परवाह किए बिना अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं। सिंचाई विभाग की इस कॉलोनी में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है।

By: Satyam Dubey  RNI News Network
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कॉलोनी की मरम्मत के लिए पास हुए बजट को डकार जाते हैं सिंचाई विभाग के अधिकारी, स्थिति बद से बदतर

सीएम योगी सूबे के विकास के लिए कहीं से भी कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। साथ उनका सख्त निर्देश है कि किसी भी कार्य का मानक जनता की संतुष्टी और फीडबैक से तय होगा। इसके बाद भी कुछ विभाग ऐसे हैं, जो सीएम के निर्देश का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला आगरा जिले से सामने आया है। जिले के सिंचाई विभाग की एक के बाद एक कई योजनाओं की कलई खुलकर सामने आ रही है। ताज रोड स्थित सिंचाई विभाग कॉलोनी की हालत बद से बदतर है।

यहां तीन साल से लगातार कई मकानों में मरम्मत कार्य के लिए मोटा बजट पास होता है। लेकिन मकानों की हालत अब भी जर्जर है। मकानों की जर्जर हालत से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी मरम्मत कार्य के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल खेल रहे हैं। सदर इलाके की सिंचाई विभाग की कॉलोनी जंगल जैसी नजर आने लगी है। यहां सभी मकान जर्जर हालत में है जो कि कभी भी धराशाई हो सकते हैं। सिंचाई विभाग के कर्मचारी इन मकानों में रहने को मजबूर हैं।

आपको बता दें कि सिंचाई विभाग के अधिकारी विभाग के कॉलोनी में रहने वालों की जान की परवाह किए बिना अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं। सिंचाई विभाग की इस कॉलोनी में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है। जगह-जगह टूटी सड़क जलभराव है। जिसकी वजह से संचारी रोग फैलने की स्थिति भी बनी हुई है। लेकिन विभाग के अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधे और कानों में रुई दबाए दिखाई दे रहे हैं। यहां तीन साल से लगातार मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों ने अब इस बार फिर मोटा भ्रष्टाचार करने का प्लान तैयार कर लिया है।

कॉलोनी के एंट्रेंस में ही दो मकान बने हैं। इन मकानों में लगातार 3 साल से मरम्मत कार्य कराए जाने की बात कहीं जा रही है। वहीं, एक बार फिर इस कॉलोनी का कायाकल्प कराने के लिए सरकार ने लगभग एक करोड़ 27 लाख रुपए की परियोजना पास कर की है। अब इस परियोजना में भी भ्रष्टाचार का खेल होता दिखाई दे रहा है। यहां रहने वाले कर्मचारी सिंचाई विभाग के हैं, इसलिए वे कैमरे पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। लेकिन आंखों में आंसू लिए विभाग को हर दिन वह कोसते हैं क्योंकि विभाग की लापरवाही के चलते वह जिंदगी और मौत के बीच इन जर्जर मकानों में अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं।

कई लोग तो ऐसे हैं जिन्हें इस कॉलोनी के अंदर रहते हुए लगभग 35 साल से ज्यादा हो गए। उन लोगों का साफ तौर पर कहना है कि सिंचाई विभाग की तरफ से यहां किसी प्रकार का कोई काम नहीं कराया गया है। कॉलोनी की हालत जंगल से भी बदतर हो गई है। बड़ा सवाल यही है कि उस कॉलोनी में परियोजना के लिए जो एक करोड़ 27 लाख रुपए पास हुए हैं, क्या उन पैसों से भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी इस कॉलोनी का कायाकल्प करा पाएंगे। सिंचाई विभाग की परियोजनाओं में लगातार एक के बाद एक कई झोल सामने आ रहे हैं।

आगरा जिले में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लखनऊ बैठे हाईकमान का भी कोई डर नहीं है। यही वजह है कि यहां हर काम में झोल है और सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की परिवार तक का फिक्र किए बिना लगातार भ्रष्टाचार के खेल पर खेल खेल रहे हैं। यहां रहने वाली उपासना से जब यूपी की बात की टीम ने यहां के हालात के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यह कॉलोनी टूटा पड़ा है। बारिश के मौसम में यहां पानी भर जाता है। उन्होंने बताया कि 35 साल हो गए रहते कोई काम नहीं कराया गया है।

आगरा से संवाददाता सैय्यद शकील की रिपोर्ट।

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