उत्तर प्रदेश सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास और बड़े पैमाने पर निवेश का दावा कर रही है, वहीं मुजफ्फरनगर जिले के खतौली स्थित सरकारी अस्पताल की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आई, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल के महिला वार्ड, मरीजों के कमरों, प्रतीक्षालय और पूरे परिसर में कूड़े-कचरे के ढेर लगे हुए पाए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दिनों से अस्पताल में समुचित सफाई नहीं हुई है। गंदगी के कारण मरीजों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि यहां नियमित सफाई कर्मियों की तैनाती नहीं है, जिसके कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ही बिना नियमित भुगतान के अस्पताल में साफ-सफाई का कार्य कर रहा है और वह भी लंबे समय से मानदेय की मांग कर रहा है।

अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, मरीजों और उनके परिजनों ने नाराजगी जताते हुए हंगामा किया। मामले की जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के जिलाध्यक्ष संजय राठी अस्पताल पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गंदगी और अव्यवस्थाओं पर नाराजगी व्यक्त की तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को भी मौके पर बुलाकर स्थिति का संज्ञान लेने की बात कही।
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी जिले के स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण किया था। इसके बावजूद खतौली अस्पताल में व्यवस्थाओं में सुधार न होने पर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केवल योजनाएं ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं और मरीजों को कब तक राहत मिलती है।