पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शिवसेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को मुरादाबाद कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से एडीएम को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से मांगों पर विचार करने की अपील की गई।
शिवसेना ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना है कि यह क्षेत्र कृषि, उद्योग, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पदाधिकारियों के अनुसार, अलग राज्य बनने से क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करने और प्रशासनिक स्तर पर लोगों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
प्रदर्शन के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स की स्थापना की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को गंभीर उपचार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में पश्चिमी यूपी में उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान स्थापित होने से स्थानीय लोगों को सुविधा मिल सकती है।

शिवसेना ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ स्थापित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की। संगठन ने कहा कि पश्चिमी यूपी के लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, इसलिए क्षेत्र में स्थायी खंडपीठ की व्यवस्था की जानी चाहिए।
ज्ञापन में मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, संभल, बागपत, हापुड़ और गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों का उल्लेख किया गया। संगठन ने क्षेत्र की प्रशासनिक और सामाजिक जरूरतों को देखते हुए अलग राज्य के प्रस्ताव पर संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान शिवसेना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला प्रमुख नन्हे चौधरी उर्फ दिनेश चौधरी समेत संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से पहले भी समय-समय पर प्रदर्शन और आंदोलन किए जाते रहे हैं।