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अयोध्या दान गणना कक्ष मामला: SIT रिपोर्ट में 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख

अयोध्या दान गणना कक्ष मामले की SIT रिपोर्ट में CCTV के आधार पर 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया गया। छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई, जबकि चंपत राय पर कोई टिप्पणी नहीं है।

By: BS Yadav  RNI News Network
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अयोध्या दान गणना कक्ष मामला: SIT रिपोर्ट में 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख

अयोध्या में दान गणना कक्ष से जुड़े कथित गबन और अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की 9 पेज की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। ट्रस्ट की बैठक के बाद रिपोर्ट मीडिया तक पहुंची, जिसमें प्रथम दृष्टया चोरी और गबन के संकेत मिलने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच में कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं। जांच दल ने करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया है, जिनमें कुछ कर्मचारियों को कथित रूप से नोट छिपाते और हटाते हुए देखा गया। हालांकि, इन निष्कर्षों की अंतिम पुष्टि आगे की कानूनी जांच और प्रक्रिया के अधीन होगी।

SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कथित अनियमितताएं किसी एक दिन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि लगातार होती रहीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले की घटनाओं का आकलन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संभव नहीं हो सका।

जांच में यह भी सामने आया कि दान गणना प्रक्रिया के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और एमओयू (MoU) तो मौजूद थे, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार तलाशी, सीसीटीवी निगरानी और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने में गंभीर लापरवाही बरती गई।

SIT ने छह लोगों की भूमिका को प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताया है। रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा के नाम दर्ज हैं। साथ ही कई आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में पर्यवेक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। निगरानी तंत्र की विफलता, गणना प्रभारी की भूमिका, हंडियों की चाबियों पर अनौपचारिक नियंत्रण तथा नियुक्ति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। साथ ही अनिल मिश्रा की निगरानी संबंधी जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

SIT ने संकेत दिया है कि इस मामले में विस्तृत अंतिम रिपोर्ट अलग से प्रस्तुत की जाएगी। वहीं, उपलब्ध प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय का नाम शामिल नहीं है और उनके संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गई है।

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