बलिया में सैकड़ों आशा कार्यकत्रियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। आशा कार्यकत्रियों ने सरकार से सम्मानजनक और निश्चित मानदेय देने, उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने तथा प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकत्रियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।
आशा कार्यकत्री शशि सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते समय कहा कि उनकी मांगों को केवल फाइलों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी बात सरकार के उच्च स्तर तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकत्रियों ने कोरोना महामारी के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने, कोरोना संक्रमित मरीजों को आइसोलेट कराने और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का काम किया था।
शशि सिंह ने कहा कि कोरोना काल के दौरान आशा कार्यकत्रियों के योगदान की सराहना की गई थी। उनके सम्मान में फूल बरसाए गए और उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बताया गया। लेकिन उनका आरोप है कि अब कई वर्षों से उनकी समस्याओं और मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
आशा कार्यकत्रियों का कहना है कि उन्हें टुकड़ों में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि स्वीकार्य नहीं है। उनका दावा है कि वे लगातार 24 घंटे जिम्मेदारी निभाती हैं। प्रसव के मामलों में कई बार उन्हें दो से तीन दिन तक मौके पर रहना पड़ता है, जिसके दौरान वहीं रहकर भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं।प्रदर्शनकारी आशा कार्यकत्रियों ने सरकार से मांग की कि उनका मानदेय निश्चित किया जाए और उन्हें सम्मानजनक भुगतान मिले। साथ ही राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
आशा कार्यकत्रियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में वे अपनी ताकत दिखाएंगी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकत्रियों ने कहा कि उनकी समस्याओं की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती।
संजय कुमार तिवारी की रिपोर्ट