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करीब छह महीने पहले शिफ्ट हुए जिला अस्पताल की हालत जर्जर, आए दिन होती रहती है घटना

तीन जुलाई को भी यहां से ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। बिल्डिंग के सेकेंड फ्लोर पर लैब के पास गैलरी में फॉल्स सीलिंग गिरी थी।

By: Satyam Dubey  RNI News Network
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करीब छह महीने पहले शिफ्ट हुए जिला अस्पताल की हालत जर्जर, आए दिन होती रहती है घटना

नोएडा में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित कोई परेशानी न हो इसके लिए तीन साल पहले नोएडा अथॉरिटी ने जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग बनाई। सेक्टर-39 स्थित नई बिल्डिंग को बनाने में 519 करोड़ रुपए खर्च हुए। बाहर से चमचमाती और अंदर टाइल्स, फॉल सिलिंग लगी बिल्डिंग को देखकर ही लोग समझ जाते हैं कि नोएडा में लोगों के इलाज की उत्तम व्यवस्था है। लेकिन बाहर से चमचमाती बिल्डिंग कुछ और ही गवाही दे रही है। इस बिल्डिंग में इलाज कराने आने वाले मरीज, तीमारदार और डॉक्टरों को हमेशा डर बना रहता है।

बाहर से चमचमाती इस बिल्डिंग में पत्थर, टाइल्स और फॉल सीलिंग गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। गुरुवार को बिल्डिंग के गेट नंबर 5 के पास तकरीबन 10 फिट की उंचाई से पत्थर का एक बड़ा पार्ट टूटकर गिर गया। बस अच्छाई यही थी कि उसकी चपेट में कोई नहीं आया। इससे कुछ ही घंटे पहले बिल्डिंग के छठे फ्लोर पर डायलिसिस रूम में फॉल्स सीलिंग उखड़कर गिरी थी। जब फॉल्स सीलिंग गिरी तो उस वक्त डायलिसिस रूम में तीन मरीज भर्ती थे और मेडिकल स्टाफ भी मौजूद था।

तीन जुलाई को भी यहां से ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। बिल्डिंग के सेकेंड फ्लोर पर लैब के पास गैलरी में फॉल्स सीलिंग गिरी थी। इन घटनाओं से बिल्डिंग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इन घटनाओं के बाद सीएमएस ने हॉस्पिटल के स्ट्रक्चर की जांच और फॉल्स सीलिंग के गिरे हुए हिस्सों को ठीक कराने के लिए नोएडा अथॉरिटी को पत्र लिखा है। क्योंकि नोएडा अथॉरिटी ने ही इस बिल्डिंग को तैयार किया है।

जिला हॉस्पिटल में हर रोज 2 हजार से ज्यादा लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। जबकि भारी संख्या में मरीज भी भर्ती हैं। अस्पताल की नई बिल्डिंग साल 2020 में बनकर रेडी हुई थी। उस वक्त कोविड महामारी अपने चरम पर थी। शासन ने निर्देश दिया कि कोविड अस्पताल बनाया जाए। कोरोना महामारी खत्म होने के बाद जिला अस्पताल को इस बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया। इस बिल्डिंग के बनने से पहले जिला अस्पताल सेक्टर 30 में स्थित चाइल्ड पीजीआई से संचालित हो रही थी। नोएडा अथॉरिटी इस बिल्डिंग को अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर कर चुकी है।

इसी साल जनवरी में जिला अस्पताल की शिफ्टिंग का काम नई बिल्डिंग में शुरू हुआ। चार महीने यानी कि अप्रैल में जिला अस्पताल की सभी सुविधाओं को सेक्टर 30 में स्थित चाइल्ड पीजीआई की बिल्डिंग से सेक्टर 39 में बनी इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया। आपको बता दें कि नई बिल्डिंग के आठवें फ्लोर पर सीएमओ ऑफिस है। जिला अस्पताल नई बिल्डिंग में शिफ्ट हुए अभी सात महीने हुए कि आए दिन यहां फॉल्स सीलिंग और टाइल्स के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जिससे अस्पताल में भर्ती मरीज, तीमारदार और डॉक्टरों को डर बना रहता है।

तीन साल में ही हॉस्पिटल के सभी फ्लोर पर फॉल्स सीलिंग में दरारें आ गईं हैं। आशंका है कि बिल्डिंग की स्ट्रक्टचर में कई खामियां हो सकती हैं। आपको बता दें कि हॉस्पिटल के आठवें फ्लोर पर डिप्टी सीएमओ डॉ. चंदन सोनी के ऑफिस में भी फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना सामने आ चुकी है। अगर ऐसी घटनाएं लगातार होती रही तो किसी दिन बड़ी घटना घट सकती है। क्योंकि हॉस्पिटल की ओपीडी में हजारों लोग परामर्श लेने आते हैं।

हॉस्पिटल की बिल्डिंग में इतनी घटनाएं घट चुकी हैं। इसके बाद भी यहां की समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। हॉस्पिटल में प्रवेश करने के लिए मेन गेट के अलावा एक और गेट है। इस गेट से इमरजेंसी में एंबुलेंस प्रवेश करती है और रैंप से मरीज को दूसरे फ्लोर पर भेजा जाता है। यह रैंप बीम पर बना हुआ है और रैंप के नीचे ऑक्सीचन प्लांट लगाया गया है। यहां रैंप के एक-एक बीम से पानी का रिसाव होता रहता है। अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी दिन यहां भी बड़ी घटना घट सकती है।

नोएडा जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल से जब इस बारे में यूपी की बात के संवाददाता ने पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने बताया कि थोड़ी फॉल सीलिंग डिसलॉक हुईं हैं, थोड़ी से टाइल्स निकल गईं हैं। जिसके बाद अथॉरिटी को जानकारी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी शासन को भी दे दी गई है। डीएम को अवगत करा दिया गया है।

नोएडा से संवाददाता यूनुस आलम की रिपोर्ट।

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