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कानपुर में 93वीं क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी का शुभारंभ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं- कारीगरों को मिले हुनर का सही मूल्य

कानपुर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार इसमें शामिल हैं। राज्यपाल ने कारीगरों को उचित मूल्य, बाजार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।

By: Nivedita  RNI News Network
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कानपुर में 93वीं क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी का शुभारंभ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं- कारीगरों को मिले हुनर का सही मूल्य

कानपुर।  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की ओर से आयोजित पांच दिवसीय 93वीं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के स्टॉल देखे और उनसे बातचीत कर पारंपरिक कलाओं तथा उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी ली। प्रदर्शनी में देश के करीब 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार अपनी कलाकृतियों और हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहित करने के साथ कारीगरों को नए बाजार और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

22 राज्यों की हस्तकलाओं का अनूठा संगम

क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी में भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है। यहां फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट और पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला सहित कई पारंपरिक शिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। आगंतुकों को एक ही स्थान पर अलग-अलग राज्यों की कलाओं को देखने, उनके निर्माण की बारीकियां समझने और सीधे शिल्पकारों से उत्पाद खरीदने का अवसर मिल रहा है। आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50 रुपये से शुरू होने वाले उत्पाद भी उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही, कुछ पारंपरिक कलाओं का सजीव प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

कारीगरों को उचित मूल्य और बाजार मिलना जरूरी: राज्यपाल

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि देश के पारंपरिक शिल्पकार आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण ताकत हैं। किसी भी हस्तनिर्मित उत्पाद के पीछे कारीगर का अनुभव, मेहनत, समय और पीढ़ियों से सीखा गया कौशल होता है। इसलिए उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य, सम्मान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि क्राफ्टरूट्स जैसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाने के साथ कारीगरों की आजीविका मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हस्तशिल्प को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है।

पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि देश की कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में हैं। इन्हें बचाने के लिए जरूरी है कि कारीगरों को सम्मानजनक आमदनी और अपने उत्पाद बेचने के पर्याप्त अवसर मिलें। इससे युवा पीढ़ी भी पारंपरिक शिल्प सीखने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अनुभवी शिल्पकारों को विद्यार्थियों के प्रशिक्षण से जोड़ने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि कारीगरों की कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, ताकि विद्यार्थी उनके साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करके पारंपरिक कला की तकनीक और बारीकियां सीख सकें।

शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार को जोड़ने की अपील

राज्यपाल ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुभवी कारीगरों, उद्यमियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों का व्यावहारिक ज्ञान विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे कौशल सिखाने की आवश्यकता बताई, जिनके जरिए वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उनके अनुसार, पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों पर आधारित छोटे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं।

 

 

कानपुर के शिल्पकारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश

राज्यपाल ने कानपुर के जिलाधिकारी और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जिले के पारंपरिक कलाकारों एवं शिल्पकारों की सूची तैयार कराई जाए। साथ ही, उनकी जरूरतों के अनुसार उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय कलाकार अपनी प्रदर्शनियां आयोजित करना चाहते हैं, तो प्रशासन उन्हें उपयुक्त स्थान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करे। इससे शिल्पकारों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

हस्तनिर्मित उत्पाद खरीदने की अपील

राज्यपाल ने उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम लोगों से स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उपहार देने के लिए शॉल, पारंपरिक वस्त्र, सजावटी सामान और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। ऐसे प्रयासों से कारीगरों की आमदनी बढ़ सकती है और उनके उत्पादों को नियमित बाजार मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हस्तनिर्मित वस्तुओं के निर्माण में लगने वाले श्रम और कौशल को समझना तथा उसके अनुसार उचित मूल्य देना जरूरी है।

महिला कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी फोकस

ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की संस्थापिका अनारबेन पटेल ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तकलाओं को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही महिला शिल्पकारों सहित कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पांच दिवसीय यह प्रदर्शनी पारंपरिक कला, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को एक मंच पर लाने की पहल है। इससे देशभर के शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

 

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