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फलीभूत हो रहे हैं जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा के प्रयास, जेल के अंदर चलेगी पंचायत

जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा कार्यशैल दूसरे अधिकारियों से भिन्न है। जेल सुधार को लेकर वे तमाम तरह के प्रयास कर रहे हैं। उनके इन प्रयासों की हर जगह सराहना हो रही है। जेल की व्यवस्था को और प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सीताराम शर्मा ने सुधार की दिशा में कई नए तरह के प्रयोग किए हैं। जिससे जिला कारागार अब सुधार गृह की तरह तब्दील होने लगा है। जिसके चलते मुजफ्फरनगर जेल को नई पहचान मिल रही है। जेल के अंदर उन्होंने ऐसे ही एक नया फार्मूल चौपाल के रूप में लागू किया है। जो वाकई जेल सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

By: Desk Team  RNI News Network
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फलीभूत हो रहे हैं जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा के प्रयास, जेल के अंदर चलेगी पंचायत

मुजफ्फरनगरः जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा कार्यशैल दूसरे अधिकारियों से भिन्न है। जेल सुधार को लेकर वे तमाम तरह के प्रयास कर रहे हैं। उनके इन प्रयासों की हर जगह सराहना हो रही है। जेल की व्यवस्था को और प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सीताराम शर्मा ने सुधार की दिशा में कई नए तरह के प्रयोग किए हैं। जिससे जिला कारागार अब सुधार गृह की तरह तब्दील होने लगा है। जिसके चलते मुजफ्फरनगर जेल को नई पहचान मिल रही है। जेल के अंदर उन्होंने ऐसे ही एक नया फार्मूल चौपाल के रूप में लागू किया है। जो वाकई जेल सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस नए फार्मूले के तहत जेल में बाकायदा चौपाल लगेगी। जिसमें सरपंच की मौजूदगी में उप-सरपंच जेल सुधार और बेहत्तर व्यवस्था पर काम करेंगे। इस चौपाल में जेल में बंदी ही सरपंच और उप-सरपंच की भूमिका निभाएंगे और काम करेंगे।

जेल के अंदर छह समितियों का किया गया गठन

यह चौपाल जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में लगेगी। इसमें मुख्य रूप से 6 समितियों का गठन किया गया है। पहली समिति में योगा से संबंधित योग प्रशिक्षण के अलावा योग के प्रति बंदियों को जागरुक करना तथा ऐसे योग्य, अनुभवी, अति कुशल बंदियों को इसमें रखा गया है। जो योग की पूरी जानकारी रखते हों और बैरकों में बंदियों को योग के लिए प्रेरित कर सकें। साथ ही बंदियों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति अभिरूचि पैदा कर सकें। दूसरी समिति चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को लेकर बनाई गई है, ताकि ऐसे बंदियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। जिसमें उनकी बीमारी के विवरण के साथ-साथ उपचार, बाहर रैफर किये जाने की निगरानी के साथ ही खुद बीमार बंदियों पर नजर रखेंगे और उनकी काउंसिलिंग खुद भी करेंगे तथा चिकित्सक का भी सहयोग लेंगे। तीसरी समिति स्वच्छता को लेकर बनाई गई है, जो जेल के अंदर साफ सफाई और स्वच्छता का संचालन करेगी, ताकि जेल के अंदर का माहौल पूरी तरह बेहत्तर रह सके। इसके लिए बंदियों को जागरुक किया जाएगा कि वातावरण को बेहत्तर बनाने में सहयोग करें। चौथी समिति अनुशासन की बनाई गई है। ताकि जेल में आने वाले नए बंदियों को अनुशासन और नियमों के बारे में बताया जा सके। इसके साथ ही पांचवी विधिक सहायता समिति में कानून के जानकार बंदियों को रखा गया है। जो बंदियों की तारीख, पेशी, जुर्माना, जमानत हो गई और जमानतदार नहीं ले रहे हैं, तो उसकी सूची तैयार करना तथा सामान्य विधिक जानकारी उपलब्ध कराना इस समिति का प्रमुख ध्येय रहेगा। छठवीं शिक्षा एवं कौशल विकास समिति में बंदियों को प्रोफाइल बनाकर सूची बनाना ताकि कौशल विकास से प्रशिक्षण दिलाकर बंदियों में निखार लाया जा सके। ताकि बंदी जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़कर समाज के लिए अच्छा कार्य कर सकें। साथ ही ऐसे बंदियों की पहचान करना जो पूरी तरह से निरक्षर हैं, उनको अलग समिति के माध्यम से शिक्षित किए जाने पर भी शिक्षा विभाग के साथ काम चल रहा है।

बंदियों की रूचि और योग्यता को दी गई तरजीह

कुल मिलाकर इन समितियों में रूचि, लगन, योग्यता एवं अनुभव को तरजीह दी गई है। चौपाल पर जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा खुद सुनवाई करेंगे तथा सरपंच की उपस्थिति में उप सरपंच अपनी अपनी समिति की रिपोर्ट पेश किया करेंगे। प्रदेश की किसी भी जेल में यह पहला प्रयोग है। जो जेल सुधार की दिशा में एक अभूतपूर्व क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। कुल मिलाकर जेल की अंदरुनी व्यवस्था इस प्रयोग से निश्चित ही मजबूत और पारदर्शी होगी। बता दें कि इससे पहले भी उन्होंने जेल सुधार की दिशा में कई सराहनीय कदम उठाए हैं। जेल में बंदियों के लिए कंप्यूटर लैब बनायी गई जिसमें बंदियों को कंप्युटर की शिक्षा मिल सके।

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