वात्सल्य ग्राम स्थित समविद् गुरुकुलम परिसर में दशहरा मेले का आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। आयोजन की शुरुआत साध्वी ऋतंभरा ने भगवान श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके की। इस अवसर पर गुरुकुलम की छात्राओं ने रामायण प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
समविद् गुरुकुलम की छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘धर्मस्य जय-अधर्मस्य क्षय’ की अवधारणा को दर्शाया। कार्यक्रम में चारों युगों की घटनाओं को संक्षिप्त नाट्य रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन हुआ, जिसमें अंततः श्रीराम की विजय दिखाई गई। छात्राओं के अभिनय और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में पद्म विभूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा ने भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मर्यादाओं का उल्लंघन व्यक्ति के पतन का कारण बनता है, जबकि अनुशासित और धर्मसम्मत जीवन अंततः विजय की ओर ले जाता है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि रावण के पास मायावी रथ और शक्ति थी, लेकिन भगवान श्रीराम के पास धर्म, साहस और संयम की ताकत थी। इसी नैतिक शक्ति के बल पर उन्होंने विजय प्राप्त की।

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि दशहरे पर रावण के पुतले का दहन करना केवल एक प्रतीकात्मक परंपरा है। वास्तविक बदलाव तब आएगा, जब व्यक्ति अपने भीतर मौजूद अहंकार, द्वेष, घमंड, काम और क्रोध जैसी बुराइयों को समाप्त करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है। उनके अनुसार, मनुष्य को राम जैसा बनने से पहले अपने आचरण में रामत्व विकसित करना चाहिए। सत्य, संयम, मर्यादा और धर्म के प्रति निष्ठा ही जीवन को सही दिशा देने वाले गुण हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्राओं ने रामायण के प्रमुख पात्रों का अभिनय किया। रचि ने भगवान श्रीराम, अक्षिता ने माता सीता, भव्या ने लक्ष्मण, गौरी ने भरत, श्रेया ने शत्रुघ्न और वैष्णवी ने हनुमान की भूमिका निभाई। उनके अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान परिसर में उत्सव का माहौल रहा और लोगों ने विजयादशमी के धार्मिक महत्व को महसूस किया।
दशहरा मेले में संजय भैया, स्वामी सत्यशील, समविद् की निदेशक सुमन लता, पूर्व आईजी एच.के. शर्मा, साध्वी शिरोमणि, साध्वी सत्यश्रुति, साध्वी सत्यनिष्ठा और गुरुकुलम की माताएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में उपप्रधानाचार्या पूजा सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन धनंजय मिश्रा ने किया। समविद् गुरुकुलम में आयोजित इस दशहरा मेले ने धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नैतिक मूल्यों के संदेश को एक मंच पर प्रस्तुत किया।